अंग्रेजी हकुमत के दौरान देश को गाँधी जी कि जरूरत थी, और आज कांग्रेसी हकुमत के दौरान बाबा राम देव जैसे लोगो कि सख्त जरुरत हैं. - तारकेश्वर गिरी.
आज भारतीय सरकार का चेहरा इतना बिगड़ चूका हैं कि उसको पहचान पाना मुश्किल हो रहा हैं. जब मुखिया ही चोर हो तो घर के बाकि सदस्यों से ईमानदारी कि उम्मीद कंहा कि जा सकती हैं. आज कि तारीख में नेतागिरी करना एक व्यसाय बन गया हैं, और तरक्की तब मिल जाती हैं जब कोई मंत्री पद मिल जाये. आज कि तारीख में नेतावो और मंत्रियों के पास जितना काला धन हैं उतना धन तो किसी बड़े उद्योगपति के पास सफ़ेद रूप में भी नहीं हो सकता.
भ्रस्टाचार भारत के मंत्रियों और नेतावो के साथ-साथ अधिकारीयों के खून में मिल चूका हैं, आज जरुरत हैं कि उस खून को साफ किया जाये और ये बताया जाय कि आपके खून में गरीबो का भी खून मिला हुआ हैं.
कांग्रेसी नेता आज पागल कुत्ते कि तरह सोनिया गाँधी के पीछे -पीछे दुम हिला रहे हैं. ये नेता और मंत्री लोग ये भूल चुके हैं कि वो भारतीय हैं. बल्कि सोनिया गाँधी के साथ लग करके देश को लुटने में लगे हुए हैं.
महंगाई , जातिवाद , धर्म ,मंदिर -मस्जिद के नाम पर पुरे देश को नरक में डाल दिया हैं ईस सरकार ने.
सबसे ज्यादे जातिवाद फ़ैलाने में कांग्रेसी सरकार का ही हाथ हैं.
Saturday, February 26, 2011
Thursday, February 24, 2011
दिल्ली पुलिस ने लाखो कमाए आज. -- - - - तारकेश्वर गिरी.
आज दिल्ली के फिरोज शाह कोटला मैदान पर (क्रिकेट विश्व कप -२०११) साउथ अफ्रीका और वेस्ट इंडीज के बीच मैच हुआ. जिसकी सुरक्षा में दिल्ली पुलिस आज सुबह से लगी हुई हैं, हर चौराहे पर हर गली में , और वो क्या कहते हैं , हाँ हर नुक्कड़ पर पुलिस कि चेकिंग जारी हैं कि कंही कोई आंतकवादी दिल्ली में ना घुस जाये.
लेकिन हुआ उल्टा , आतंकवादी तो घुसा नहीं, हाँ दिल्ली पुलिस ने लाखो जरुर अपने -अपने घरो में घुसा लिए.
अब आप पूछेंगे कि भाई गिरी जी वो कैसे , दिल्ली पुलिस का तो कर्त्तव्य हैं कि वो हर संदिघ्द इन्सान पर नज़र रखे और वो कर भी रहे हैं. तो इसमें लाखो कैसे कमा गये..........
तो हुआ ये कि बड़े दिनों से ऐसा कोई आयोजन तो हो नहीं रहा था , और वैसे भी दिल्ली में मंहगाई इटली से इम्पोर्ट हो रही हैं, तो बेचारी दिल्ली पुलिस भी अपने -अपने घर का बजट सँभालने के चक्कर में ईस शुभ अवसर का इंतजार कर रही थी, और जैसे ही आदेश मिला कि सावधान हर जगह सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दो और हर आने -जाने वालो पर कड़ी नज़र रखो .
फिर क्या दिल्ली वाले तो कभी भी अपनी गाड़ी में पूरा पेपर ( R.C., Insurance, Pollution Certificate and Driving License) तो रखते नहीं हैं, और दिल्ली पुलिस को भी ये बात अच्छी तरह से पता हैं .
अरे भाई साहेब फिर क्या ...... लोग अपना काम सौ -पचास में चलाने लगे और दिल्ली पुलिस ने लाखो कमा लिए.
एक बात और U.P. पुलिस भला क्यों पीछे रहती, उसने तो घर के बाहर निकलते ही हेलमेट के उपर चालान कि धमकी देनी शुरू कर दिया. अब कुछ भले आदमी जुगाड़ कर के बच गये और जो नहीं बचे वो बेचार दस-बीस रूपये दे करके निकल लिए . अब वो क्या हैं न कि उत्तर प्रदेश में अभी दिल्ली कि तरह मंहगाई नहीं हैं ना.............
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लेकिन हुआ उल्टा , आतंकवादी तो घुसा नहीं, हाँ दिल्ली पुलिस ने लाखो जरुर अपने -अपने घरो में घुसा लिए.
अब आप पूछेंगे कि भाई गिरी जी वो कैसे , दिल्ली पुलिस का तो कर्त्तव्य हैं कि वो हर संदिघ्द इन्सान पर नज़र रखे और वो कर भी रहे हैं. तो इसमें लाखो कैसे कमा गये..........
तो हुआ ये कि बड़े दिनों से ऐसा कोई आयोजन तो हो नहीं रहा था , और वैसे भी दिल्ली में मंहगाई इटली से इम्पोर्ट हो रही हैं, तो बेचारी दिल्ली पुलिस भी अपने -अपने घर का बजट सँभालने के चक्कर में ईस शुभ अवसर का इंतजार कर रही थी, और जैसे ही आदेश मिला कि सावधान हर जगह सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दो और हर आने -जाने वालो पर कड़ी नज़र रखो .
फिर क्या दिल्ली वाले तो कभी भी अपनी गाड़ी में पूरा पेपर ( R.C., Insurance, Pollution Certificate and Driving License) तो रखते नहीं हैं, और दिल्ली पुलिस को भी ये बात अच्छी तरह से पता हैं .
अरे भाई साहेब फिर क्या ...... लोग अपना काम सौ -पचास में चलाने लगे और दिल्ली पुलिस ने लाखो कमा लिए.
एक बात और U.P. पुलिस भला क्यों पीछे रहती, उसने तो घर के बाहर निकलते ही हेलमेट के उपर चालान कि धमकी देनी शुरू कर दिया. अब कुछ भले आदमी जुगाड़ कर के बच गये और जो नहीं बचे वो बेचार दस-बीस रूपये दे करके निकल लिए . अब वो क्या हैं न कि उत्तर प्रदेश में अभी दिल्ली कि तरह मंहगाई नहीं हैं ना.............
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अंग्रेजी ने सिखाया आजादी कि राह --- तारकेश्वर गिरी
भारत पर अंग्रेजो ने लगभग २०० साल तक राज किया, मगर जैसे ही भारतीयों को मौका मिला पढ़ लिख करके आजादी कि आवाज बुलद करने में लग गये.
और भारत को अंग्रेजी हकुमत से मुक्त भी कराया और येही नहीं सम्पूर्ण भारत का सपना भी पूरा हुआ.
आज अरब देशे में भी येही हाल हैं.मदरसे कि पढाई के बजाय लोगो ने अंग्रेजी शिक्षा पद्धति पर जोर दिया और ५० -५० साल से चली आ रही राज तंत्र कि व्यस्था पर आवाज बुलंद भी करने लगे.
आज का युवा वर्ग ये बात अच्छी तरह से जनता हैं कि उसको किस तरह कि आज़ादी चाहिए और आज़ादी के फायदे क्या हैं. एक आम आदमी को सरकार से क्या -क्या उम्मीद होती हैं और सरकार का मतलब क्या होता हैं.
अरब देशो में चल रही क्रांति को देखते हुए चीन के भी माथे पर पसीने कि लकीरे बनती नज़र आ रही हैं.
और भारत को अंग्रेजी हकुमत से मुक्त भी कराया और येही नहीं सम्पूर्ण भारत का सपना भी पूरा हुआ.
आज अरब देशे में भी येही हाल हैं.मदरसे कि पढाई के बजाय लोगो ने अंग्रेजी शिक्षा पद्धति पर जोर दिया और ५० -५० साल से चली आ रही राज तंत्र कि व्यस्था पर आवाज बुलंद भी करने लगे.
आज का युवा वर्ग ये बात अच्छी तरह से जनता हैं कि उसको किस तरह कि आज़ादी चाहिए और आज़ादी के फायदे क्या हैं. एक आम आदमी को सरकार से क्या -क्या उम्मीद होती हैं और सरकार का मतलब क्या होता हैं.
अरब देशो में चल रही क्रांति को देखते हुए चीन के भी माथे पर पसीने कि लकीरे बनती नज़र आ रही हैं.
Wednesday, February 23, 2011
मैं भी चाहती हूँ हसीन सपने देखना-------------- तारकेश्वर गिरी.
मैं भी चाहती हूँ हसीन सपने देखना,
मुस्कुराना गाना
सबकी यादो मैं.
बंधन हैं समाज का रोकता हैं जमाना
मैं तो बनी हूँ
बस आम लोगो के लिए ही.
कोई भी नहीं देखता प्यार से
ना कोई पास हैं आता
काम ही ऐसा हैं रोकता हैं जमाना.
आरजू हैं मेरी आपसे
बस थोडा सा हाथ बढ़ाना
घर मैं कचरे का ढेर अब मत बढ़ाना.
बहुत ढो लिया मैला अपने सर पर
घर जा करके
बच्चे को भी हैं पढ़ाना.
अगर आप साथ दे तो
मेरी भी अगली पीढ़ी
बन जाये
आपकी तरह.
मुस्कुराना गाना
सबकी यादो मैं.
बंधन हैं समाज का रोकता हैं जमाना
मैं तो बनी हूँ
बस आम लोगो के लिए ही.
कोई भी नहीं देखता प्यार से
ना कोई पास हैं आता
काम ही ऐसा हैं रोकता हैं जमाना.
आरजू हैं मेरी आपसे
बस थोडा सा हाथ बढ़ाना
घर मैं कचरे का ढेर अब मत बढ़ाना.
बहुत ढो लिया मैला अपने सर पर
घर जा करके
बच्चे को भी हैं पढ़ाना.
अगर आप साथ दे तो
मेरी भी अगली पीढ़ी
बन जाये
आपकी तरह.
Tuesday, February 22, 2011
मोबाइल नंबर से पता करिए किसी कि भी सही लोकेशन - तारकेश्वर गिरी.
एक नई और बहु -उपयोगी जानकारी आप सभी के लिए ले कर के आया हूँ. वैसे तो इसका इस्तेमाल अभी तक अमेरिका ही करता आ रहा हैं मगर अब आप भी कर सकते हैं और वो भी बिलकुल मुफ्त में.
आप किसी का भी मोबाइल नंबर यंहा पर डालिए और उसकी सही-सही लोकेशन क्या हैं तुरंत पता चल जाएगी. जैसे कि किसी
के मिंयाँ जी झूठ बोल रहे हो या और बहुत सी बाते........
http://www.themobiletracker.com/hindi/index.html
HOME | RULES & PRIVACY STATEMENT | WHAT IS GPS? | GPS DEVICES | COMPANY BENEFITS
उपग्रह द्वारा ट्रैकिंग में आपका स्वागत है
जीपीएस-ट्रैक उपग्रह नेटवर्क से जीएसएम मोबाइल फोन ट्रैकिंग प्रणाली
रिपीटर ट्राइएंगुलेशन पद्धति से यह प्रणाली जीपीएम और जीएसएम प्रौद्योगिकी का
उपयोग करने वाले मोबाइल फोनों को ट्रैक करती है।
ट्रैकिंग में जो भी त्रुटियां हो सकती हैं, उनके लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं।
त्रुटियों का सन्निकट मार्जिन:
यूरोप और यूके के मोबाइल फोनों के लिए 10 मीटर (अधिकतम)।
यूएसए, दक्षिण अमरीका और कनाडा के मोबाइल फोनों के लिए 25 मीटर (अधिकतम)।
अन्य स्थानों के मोबाइल फोनों के लिए 50 मीटर (अधिकतम)।
यह प्रणाली उन देशों में काम नहीं करेगी जिनमें जीएसएम प्रौद्योगिकी वाले नेटवर्क नहीं हैं।
किसी फोन नंबर को यहां से ट्रैक करें
देश चुनें
फोन नंबर
महत्वपूर्ण: इस प्रणाली का उपयोग मात्र सूचना उद्देश्यों के लिए ही है,
यदि उपयोगकर्ता इसका दुरुपयोग करे, तो इसके लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं।
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के मिंयाँ जी झूठ बोल रहे हो या और बहुत सी बाते........
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यूरोप और यूके के मोबाइल फोनों के लिए 10 मीटर (अधिकतम)।
यूएसए, दक्षिण अमरीका और कनाडा के मोबाइल फोनों के लिए 25 मीटर (अधिकतम)।
अन्य स्थानों के मोबाइल फोनों के लिए 50 मीटर (अधिकतम)।
यह प्रणाली उन देशों में काम नहीं करेगी जिनमें जीएसएम प्रौद्योगिकी वाले नेटवर्क नहीं हैं।
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Monday, February 21, 2011
फुरसत में कभी हो अगर -तारकेश्वर गिरी.
फुरसत में कभी हो अगर
तो दो पल हमें भी देना.
अपना प्यार.
हम तो यूँ ही बस
खाली-खाली से सोचते हैं
कौन हैं मेरा यार.
तो दो पल हमें भी देना.
अपना प्यार.
हम तो यूँ ही बस
खाली-खाली से सोचते हैं
कौन हैं मेरा यार.
Sunday, February 20, 2011
औरत ही औरत कि सबसे बड़ी दुश्मन होती हैं, -- तारकेश्वर गिरी.
चाहे सास बहु हो या ननद भाभी कि लड़ाई हमेशा कंही ना कंही औरत ही औरत कि दुश्मन बनी नज़र आती हैं. दहेज़ का मामला हो या दहेज़ के चक्कर मैं हत्या का मामला हो कंही न कंही ननद या सास ही दोषी नज़र आती हैं और सजा भी मिलती हैं.
भारत जैसे पुरुष प्रधान देश में भी आज भी हालत ये हैं कि घर कि मुखिया औरत ही होती हैं, और हर काम में उसकी दखलंदाजी भी पूरी तरह से होती जैसे कि आज कि भारत सरकार में श्रीमती सोनिया गाँधी कि. किसी भी मीडिया में अगर भारत सरकार का प्रचार हो रहा हैं तो प्रधान मंत्री से पहले श्रीमती सोनिया गाँधी जी कि फोटो जरुर लगी होती हैं.
एक नई नवेली बहु शादी करके एक अंजान परिवार में अपने पति के साथ रहने आती हैं तो सबसे पहले उसे ये दर्द सताता हैं कि उसकी सास और ननद कैसी होंगी. लेकिन वही बहू जब ननद थी तो वो भूल गई थी कि वो भी कभी किसी घर कि बहु बनेगी. और जब वो सास बन जाती हैं तो फिर वो भूल जाती हैं कि वो भी कभी बहु थी.
हर भारतीय घर कि लड़ाई हैं ये .............................
भारत जैसे पुरुष प्रधान देश में भी आज भी हालत ये हैं कि घर कि मुखिया औरत ही होती हैं, और हर काम में उसकी दखलंदाजी भी पूरी तरह से होती जैसे कि आज कि भारत सरकार में श्रीमती सोनिया गाँधी कि. किसी भी मीडिया में अगर भारत सरकार का प्रचार हो रहा हैं तो प्रधान मंत्री से पहले श्रीमती सोनिया गाँधी जी कि फोटो जरुर लगी होती हैं.
एक नई नवेली बहु शादी करके एक अंजान परिवार में अपने पति के साथ रहने आती हैं तो सबसे पहले उसे ये दर्द सताता हैं कि उसकी सास और ननद कैसी होंगी. लेकिन वही बहू जब ननद थी तो वो भूल गई थी कि वो भी कभी किसी घर कि बहु बनेगी. और जब वो सास बन जाती हैं तो फिर वो भूल जाती हैं कि वो भी कभी बहु थी.
हर भारतीय घर कि लड़ाई हैं ये .............................
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