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Wednesday, February 23, 2011

मैं भी चाहती हूँ हसीन सपने देखना-------------- तारकेश्वर गिरी.

मैं भी चाहती हूँ हसीन सपने देखना,
मुस्कुराना गाना
सबकी यादो मैं.

बंधन हैं समाज का रोकता हैं जमाना
मैं तो बनी हूँ
बस आम लोगो के लिए ही.

कोई भी नहीं देखता प्यार से
ना कोई पास हैं आता
काम ही ऐसा हैं रोकता हैं जमाना.

आरजू हैं मेरी आपसे
बस थोडा सा हाथ बढ़ाना
घर मैं कचरे का ढेर अब मत बढ़ाना.

बहुत ढो लिया मैला अपने सर पर
घर जा करके
बच्चे को भी हैं पढ़ाना.

अगर आप साथ दे तो
मेरी भी अगली पीढ़ी
बन जाये
आपकी तरह.
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