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Sunday, February 20, 2011

औरत ही औरत कि सबसे बड़ी दुश्मन होती हैं, -- तारकेश्वर गिरी.

चाहे सास बहु हो या ननद भाभी कि लड़ाई हमेशा कंही ना कंही औरत ही औरत कि दुश्मन बनी नज़र आती हैं. दहेज़ का मामला हो या दहेज़ के चक्कर मैं हत्या का मामला हो कंही न कंही ननद या सास ही दोषी नज़र आती हैं और सजा भी मिलती हैं.

भारत जैसे पुरुष प्रधान देश में भी आज भी हालत ये हैं कि घर कि मुखिया औरत ही होती हैं, और हर काम में उसकी दखलंदाजी भी पूरी तरह से होती जैसे कि आज कि भारत सरकार में श्रीमती सोनिया गाँधी कि. किसी भी मीडिया में अगर भारत सरकार का प्रचार हो रहा हैं तो प्रधान मंत्री से पहले श्रीमती सोनिया गाँधी जी कि फोटो जरुर लगी होती हैं.

एक नई नवेली बहु शादी करके एक अंजान परिवार में अपने पति के साथ रहने आती हैं तो सबसे पहले उसे ये दर्द सताता हैं कि उसकी सास और ननद कैसी होंगी. लेकिन वही बहू जब ननद थी तो वो भूल गई थी कि वो भी कभी किसी घर कि बहु बनेगी. और जब वो सास बन जाती हैं तो फिर वो भूल जाती हैं कि वो भी कभी बहु थी.

हर भारतीय घर कि लड़ाई हैं ये .............................
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