Tuesday, April 6, 2010

सबसे बड़ा नक्सली हमला, 75 जवान शहीद


जागरण न्यूज़. खबरे तो बहुत पढ़ते होंगे आप लोग मगर इस खबर को भी ध्यान से पढ़ेटिप्पड़ी की कोई जरुरत नहीं है क्योंकि ये खबर जागरण न्यूज़ से कॉपी की हुई है


छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा जिले के मुकराना के जंगलों में सुबह से ही नक्सलियों के खिलाफ 'आपरेशन ग्रीन हंट' की कार्रवाई की तैयारी चल रही थी। इसके तहत सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के जवान एक सड़क पर से अवरोध हटाकर वापस लौट रहे थे। सुबह छह से सात बजे के बीच का समय रहा होगा। सुरक्षा बलों के ट्रक के आगे एक एंटी लैंडमाइन वाहन चल रहा था। सबसे पहले नक्सलियों ने इस वाहन को आईईडी [इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस] विस्फोट से उड़ा दिया। वाहन के ड्राइवर की तभी मौत हो गई। इसके बाद सुरक्षा बलों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई। हालांकि सुरक्षा बलों ने भी जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। लेकिन नक्सली चूंकि पास की पहाड़ी पर जमे हुए थे, इसलिए सुरक्षा बल उनके छापामार युद्ध का आसानी से शिकार हो गए। नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के हेलीकाप्टर को भी निशाना बनाया, लेकिन कामयाब नहीं हुए।

नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले दंतेवाड़ा में हुए इस हमले के बाद सुरक्षाकर्मियों के 75 शव निकाले जा चुके हैं। हमले में घायल सात जवानों को घटनास्थल से निकाल कर अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है।

और कितने मासूम सिपाहियों की जान लेगी हमारी सरकार

जागरण न्यूज़

Sunday, April 4, 2010

एक पाकिस्तानी के बदले मैं १७ भारतीय -2

एक पाकिस्तानी के बदले मैं १७ भारतीयपाकिस्तानी की मौत हुई ये बात तो सत्य है , वजह थी शराब बेचने की होड़क्या शारजाह पुलिश को इस बात की खबर नहीं थी, की उसके यंहा भारतीय और पाकिस्तानी दोनों मिलकर के शराब बेच रहे हैं

पाकिस्तानी की हत्या में पचास लोग गिरफ्तार किये गए , मगर उसमे से सिर्फ सत्रह हिंदुवो को ही दोषी पाया गया, क्योंकि बाकि सब पाकिस्तानी मुस्लमान थे

क्या कभी किसी ने ये सोचा है की उन सत्रह भारतीयों के परिवार वालो का क्या दोष है

क्या शरियत कानून में मौत की सजा के अलावा और कोई सजा नहीं है ? क्या ये सजा उम्र कैद में नहीं बदली जा सकती ?

भारत में तीन सौ लोगो की हत्या में शामिल कसाब अब रोज नए पैतरे बदल रहा हैहमारे ही देश के गद्दार वकील उसकी जान बचने में लगे हुए हैंरोज नए - नए साबुत पेश किये जाते हैंसंसद पर हमला करने वाले प्रमुख अभियुक्त को फांसी की सजा सुना दिए जाने के बाद भी सरकार उसे फांसी नहीं दे पा रही है

इसका मतलब ये नहीं की हमारा कानून कमजोर है , हमारे देश में माफ़ कर देने की परंपरा हैसुबह का भूला अगर शाम को घर वापस जाये तो उसे भूला नहीं कहते

Friday, April 2, 2010

एक पाकिस्तानी के बदले मैं १७ भारतीय।

एक पाकिस्तानी के बदले मैं १७ भारतीयपाकिस्तानी की मौत हुई ये बात तो सत्य है , वजह थी शराब बेचने की होड़क्या शारजाह पुलिश को इस बात की खबर नहीं थी, की उसके यंहा भारतीय और पाकिस्तानी दोनों मिलकर के शराब बेच रहे हैं

पाकिस्तानी की हत्या में पचास लोग गिरफ्तार किये गए , मगर उसमे से सिर्फ सत्रह हिंदुवो को ही दोषी पाया गया, क्योंकि बाकि सब पाकिस्तानी मुस्लमान थे

क्या कभी किसी ने ये सोचा है की उन सत्रह भारतीयों के परिवार वालो का क्या दोष है

क्या शरियत कानून में मौत की सजा के अलावा और कोई सजा नहीं है ? क्या ये सजा उम्र कैद में नहीं बदली जा सकती ?

भारत में तीन सौ लोगो की हत्या में शामिल कसाब अब रोज नए पैतरे बदल रहा हैहमारे ही देश के गद्दार वकील उसकी जान बचने में लगे हुए हैंरोज नए - नए साबुत पेश किये जाते हैंसंसद पर हमला करने वाले प्रमुख अभियुक्त को फांसी की सजा सुना दिए जाने के बाद भी सरकार उसे फांसी नहीं दे पा रही है

इसका मतलब ये नहीं की हमारा कानून कमजोर है , हमारे देश में माफ़ कर देने की परंपरा हैसुबह का भूला अगर शाम को घर वापस जाये तो उसे भूला नहीं कहते





Wednesday, March 31, 2010

कुरान और पुराण के चक्कर मैं चले गए डॉ अनवर जमाल.अब उनकी जगह कौन लेगा.


भाई वाह ! क्या बात हैकुरान और पुराण के चक्कर मैं डॉ अनवर जमाल और उनके चेले गायब ही हो गए जैसे गधे के सर से सिंघ

हुआ ये की सारे मौलाना ने बैठकर के मीटिंग की, कि ये हमारा अनवर जमाल अल्लाह को शिव कह रहा हैये तो कह रहा है की शिव ही जगत के पालन हार हैंशिव ही कल्याण करते हैइसने तो कुरान की जगह लगता है की पुराण पढ़ लिया हैबस भाई और क्या साबुत चाहिए कट्मुल्लावो को, वैसे भी ये सारे कुरान को ही सबुत मानते हैंइसी के आधार पर सुना दी सजा हमारे प्रिय मित्र श्रीमान डॉ अनवर जमाल जी को

लेकिन डॉ अनवर जी भी कंहा हार मानने वाले हैं , उन्होंने भी अपनी पूरी कि पूरी ज्ञान वर्धक ताकत का इस्तेमाल करते हुए सबको जबाब दिया.

श्रीमान अनवर जमाल जी का जबाब
* मेरे प्रिय मौलानावो आप लोग क्या बकते रहते हैं , शायद आप को ये भी नहीं पता कि पुराण का ही बिगड़ा हुआ नाम है कुरान
*दूसरा ये कि पुरे संसार मैं अल्लाह या भगवान शिव ने जानवर के साथ-साथ इन्सान भी पैदा किये हैं
*तीसरा ये कि सिर्फ इन्सान ही सबसे तेज दिमाग रखता है, जानवर या हिन्दू या मुसलमान या कोई और धर्म को मानाने वाला नहीं
*चौथा ये कि सभी इन्सान एक जैसे ही दिखते हैं तो फिर कोई मुसलमान या हिन्दू या कोई और संप्रदाय का क्यों
* पांचवा ये कि क्या इस्लाम से पहले इस दुनिया मैं इन्सान नहीं रहते थे
* छठा ये कि क्या अल्लाह सिर्फ उनकी मदद करता है जो मुसलमान हैं , तो क्या बाकि जाती या धर्म के लोग कैसे जीते हैं और क्यों वो लोग भी आराम कि जिंदगी जी रहे हैंअल्लाह उनको नरक मैं क्यों नहीं भेजता

रही बात अल्लाह और शिव कि, तो मैं सच्चा मुसलमान हूँ और अल्लाह का बंदा हूँ


ये सच्चा और कच्चा मुसलमान क्या होता मेरे अनवर भाईये आप जैसा ज्ञानी या आप के चेले ही बता सकते हैं









Sunday, March 28, 2010

Tarkeshwar Giri जी वह लेख हमारे फायदे में था वर्ना आपको अब तक 10 बार समझा दिया गया होता, भूल गये ब्‍लागिंग में वाइरस नाम की कोई चीज है,-Mohammed Umar

कैरान्वी साहेब , मुझे वाइरस दिखाने से अच्छा है की खुद में वाइरस देखोमैंने तो सिर्फ प्रितिबिम्ब दिखाया है, एक छोटा सालेख आपके फायदे मैं था इस लिए आप शांत हैनहीं तो आप क्या समझाते मुझेसमझाना ही है तो समझाइये अपने डॉ अनवर को

कंहा थे आप जब अनवर साहेब खुले रूप मैं धर्म ग्रंथो के बारे मैं उल्टा पुल्टा लिख रहे थेमैंने तो सिर्फ आपके पवित्र कुरान की कॉपी दिखाई है

किसी के धर्म ग्रंथो में से सिर्फ कमिया निकाल कर के लोगो के सामने रखना कंहा की समझदारी थीतब तो बहुत गुरु जी गुरु जी कह कर के सर पे चढ़ा रखा thaa।

और मैंने फिर भी अपने संस्कारो का परिचय देते हुए लोगो को ये दिखाने की कोशिश की है धर्म ग्रंथो का आधार हजारो साल पहले के समाज के ऊपर आधारित था ना की आज के हिसाब से





दुध की सफेदी काली पड़ने लगी है।

दुध की सफेदी काली पड़ने लगी हैक्योंकि दिन प्रतिदिन दुध के दामो मैं उछाल रहा हैदुध है की पानी -पानी होता जा रहा है और लोग कमा -कमा के काले हुए जा रहे हैंअब लोग करे भी तो क्या करेबिना दुध के काम भी तो नहीं चलने वाला हैसुबह उठते ही घर के बड़े चाय और बच्चे दुध की मांग शुरू कर देते हैंदुध बेचने वाली कंपनिया मोटी काट रही हैक्योंकि उन्हें पता है की बिना दुध के काम तो चलने वाला नहीं है

सरकार अपने आप में मस्त है उसे अभी फ़िलहाल कोई फर्क पड़ने वाला नहीं हैक्योंकि वो पूरी तरह से बहुमत में हैऔर चुनाव अभी बहुत दूर है आखिर चुनाव के लिए चंदा तो येही कंपनिया ही देंगी नाआखिर विरोध करे तो करे कौन

शायद हम और आप मिल कर के इसका विरोध कर सकते हैं सड़क पर खड़े हो कर के नारे लगाने की कोई जरुरत नहीं है और ही कोई नई पार्टी बनाने की जरुरत है इसका विरोध तो हम अपने -अपने घरो में बैठ कर के ही कर सकते हैं

बस करना ये ही है की हमें हफ्ते में किसी भी एक दिन दुध का घर बैठे बहिष्कार करना होगाउस दिन कोई भी चाय या कोफ़ी नहीं पिएगाबच्चो को उस दिन दुध की जगह ताजे फलो का रस पिलाना होगाफिर देखिये कैसे दुध बेचने वाली कंपनियों की आँखे खुलती हैअगर हमने मिलकर के सिर्फ हफ्ते में एक दिन दुध का बहिष्कार कर दिया तो इन कंपनियों की ऐसी की तैसी हो जाएगी

और अब करना पड़ेगाअगर आप सभी लोग चाहते हैं की महंगाई रुके तो