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Sunday, March 28, 2010

दुध की सफेदी काली पड़ने लगी है।

दुध की सफेदी काली पड़ने लगी हैक्योंकि दिन प्रतिदिन दुध के दामो मैं उछाल रहा हैदुध है की पानी -पानी होता जा रहा है और लोग कमा -कमा के काले हुए जा रहे हैंअब लोग करे भी तो क्या करेबिना दुध के काम भी तो नहीं चलने वाला हैसुबह उठते ही घर के बड़े चाय और बच्चे दुध की मांग शुरू कर देते हैंदुध बेचने वाली कंपनिया मोटी काट रही हैक्योंकि उन्हें पता है की बिना दुध के काम तो चलने वाला नहीं है

सरकार अपने आप में मस्त है उसे अभी फ़िलहाल कोई फर्क पड़ने वाला नहीं हैक्योंकि वो पूरी तरह से बहुमत में हैऔर चुनाव अभी बहुत दूर है आखिर चुनाव के लिए चंदा तो येही कंपनिया ही देंगी नाआखिर विरोध करे तो करे कौन

शायद हम और आप मिल कर के इसका विरोध कर सकते हैं सड़क पर खड़े हो कर के नारे लगाने की कोई जरुरत नहीं है और ही कोई नई पार्टी बनाने की जरुरत है इसका विरोध तो हम अपने -अपने घरो में बैठ कर के ही कर सकते हैं

बस करना ये ही है की हमें हफ्ते में किसी भी एक दिन दुध का घर बैठे बहिष्कार करना होगाउस दिन कोई भी चाय या कोफ़ी नहीं पिएगाबच्चो को उस दिन दुध की जगह ताजे फलो का रस पिलाना होगाफिर देखिये कैसे दुध बेचने वाली कंपनियों की आँखे खुलती हैअगर हमने मिलकर के सिर्फ हफ्ते में एक दिन दुध का बहिष्कार कर दिया तो इन कंपनियों की ऐसी की तैसी हो जाएगी

और अब करना पड़ेगाअगर आप सभी लोग चाहते हैं की महंगाई रुके तो



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