माफ़ करना मेरे दोस्तों और मेरे बुजुर्गो ये क्या हो गया आज कल के लोगो को, सब के सब अपनी -अपनी ले कर के बैठ गए, कोई जूतों को लेकर के बैठा है तो कोई पी म को ले लेकर के और तो और कुछ लोग तो मोदी के पीछे भाग रहे हैं तो कुछ लोग मायावती के, कोई सरदार जी के उपर जूता मार रहा है तो कोई मोहम्मद जिन्ना के शुभ चिन्तक के उपर जूता फैंकने की कोशिश मैं लगा हैं,
मेरे साथिओं जरा देश के बारे मैं भी तो सोचो, देश की आबादी के बारे मैं सोचो, देश के कानून के बारे मैं सोचो, देश की जनता के बारे मैं सोचो, देश मैं बढरहे प्रदुषण के बारे मैं सोचो, जरा अपने और अपने परिवार के बारे मैं सोचो।
धन्यवाद
मेरा नया ब्लॉग है : www.pollutioncontrolsociety.blogspot.com
Monday, April 27, 2009
Tuesday, February 24, 2009
आस्था और गन्दगी
मेरे प्रिय मित्रगड़ नमस्कार,
कल शिव रात्रि के पर्व पर मैं हरिद्वार में था, वंहा पर शिव भक्तो की अपार भीड़ देख कर मन बहुत खुश हुआ की देखो लोग कितने धार्मिक होते जा रहे हैं, हर तरफ से हर हर महादेव - हर हर गंगे की ध्वनि से हरिद्वार का वातावरण कितना मनोरम सा लग रहा था, उस पवित्र वातावरण में मैं भी अपने दोस्तों के साथ गंगा जी के किनारे हर की पौडी पर शिवमय हुआ घूम रहा था तभी मैंने देखा की मेरे सामने एक खाली शराब की बोतल पड़ी हुई है, मैंने मन ही मन सोचा की ये क्या इधर भी, तभी कुछ लोग एक आदमी को पिटते हुए पुलिश चौकी की तरफ़ ले कर जा रहे थे मैंने उन लोगो से पूछा की भाई इसे क्यों मर रहे हो तो उनमें से एक आदमी ने बताया की ये एक तो दारू पी रखी है और दुसरे की ये आदमी एक छोटी सी बच्ची के बिस्तर में जा कर के सोने की कोशिश कर रहा था। मेरा तो दिमाग ख़राब हो गया और माता गंगा की और देख कर के कहा की हे माता ये क्या हो रहा hai। खैर इन सब बातो को अनसुना कर के जब मैं आगे बढ़ा तो मेरे दोस्तों ने कहा की चलो हम शौच आदि से फ्री हौले , और फिर मैं अपने दोस्तों के साथ सुलभ शौचालय की तरफ़ चल दिया, अन्दर लम्बी सी लाइन लगी हुई थी मैं भी उस लाइन का एक hइस्सा बन कर के खड़ा हो गया , जब मेरा नम्बर आया तो मैं भी फ्रेश होने के लिए अन्दर गया । कहते हैं की शौचालय मैं दिमाग और अच्छी तरह से चलता है क्योंकि शौचालय सिर्फ़ शौचालय ही नही बल्कि सोच आलय भी है। अन्दर मैंअपना समय सिर्फ़ ये सोचने पर लगाया की इस शौचालय की गन्दगी गंगा जी मैं इसी जगह पर मिला दी जाए गी या कुछ दूर के बाद।
आखिर क्या हमारे पास और कोई तरीका नही है जिससे की हम इस गन्दगी को इस आस्था से दूर रख सके
मेरे पास तरीका हैं क्या आप लोग मेरा साथ देंगे
कल शिव रात्रि के पर्व पर मैं हरिद्वार में था, वंहा पर शिव भक्तो की अपार भीड़ देख कर मन बहुत खुश हुआ की देखो लोग कितने धार्मिक होते जा रहे हैं, हर तरफ से हर हर महादेव - हर हर गंगे की ध्वनि से हरिद्वार का वातावरण कितना मनोरम सा लग रहा था, उस पवित्र वातावरण में मैं भी अपने दोस्तों के साथ गंगा जी के किनारे हर की पौडी पर शिवमय हुआ घूम रहा था तभी मैंने देखा की मेरे सामने एक खाली शराब की बोतल पड़ी हुई है, मैंने मन ही मन सोचा की ये क्या इधर भी, तभी कुछ लोग एक आदमी को पिटते हुए पुलिश चौकी की तरफ़ ले कर जा रहे थे मैंने उन लोगो से पूछा की भाई इसे क्यों मर रहे हो तो उनमें से एक आदमी ने बताया की ये एक तो दारू पी रखी है और दुसरे की ये आदमी एक छोटी सी बच्ची के बिस्तर में जा कर के सोने की कोशिश कर रहा था। मेरा तो दिमाग ख़राब हो गया और माता गंगा की और देख कर के कहा की हे माता ये क्या हो रहा hai। खैर इन सब बातो को अनसुना कर के जब मैं आगे बढ़ा तो मेरे दोस्तों ने कहा की चलो हम शौच आदि से फ्री हौले , और फिर मैं अपने दोस्तों के साथ सुलभ शौचालय की तरफ़ चल दिया, अन्दर लम्बी सी लाइन लगी हुई थी मैं भी उस लाइन का एक hइस्सा बन कर के खड़ा हो गया , जब मेरा नम्बर आया तो मैं भी फ्रेश होने के लिए अन्दर गया । कहते हैं की शौचालय मैं दिमाग और अच्छी तरह से चलता है क्योंकि शौचालय सिर्फ़ शौचालय ही नही बल्कि सोच आलय भी है। अन्दर मैंअपना समय सिर्फ़ ये सोचने पर लगाया की इस शौचालय की गन्दगी गंगा जी मैं इसी जगह पर मिला दी जाए गी या कुछ दूर के बाद।
आखिर क्या हमारे पास और कोई तरीका नही है जिससे की हम इस गन्दगी को इस आस्था से दूर रख सके
मेरे पास तरीका हैं क्या आप लोग मेरा साथ देंगे
Saturday, February 7, 2009
नेताजी सावधान ****** जूता आ रहा है
नेताजी सावधान ****** जूता आ रहा है
मेरे देश के बुजुर्ग और बुद्धजीवी नेता गड नमस्कार।
बचपन मैं एक फ़िल्म देखी थी , जिसमे खलनायक अपने एक चमचे, से एक ऑफिसर को पटाने के लिए कहता है की उस ऑफिसर को चाँदी का जूता मारो और फिर भी काम न बने तो उसे सोने का जूता मारो ..काम बनेगा /
लेकिन ये क्या इराक वालों ने तो चमडे के जूते से ही काम काम चलाना चालू कर दिया। जूता और जूता मारने वाला दोनों ही दुनिया मे प्रसिद्ध हो गए । जूता कई लोगो को अमीर बना गया ।
जूते तेरे क्या नखरे
अभी कुछ दिन पहले जूता चीन मैं भी चला और आज उस जूते की तारीफ मैं कुछ कसीदे यूरोप के एक छोटे से देश मैं भी पढ़े गए ।
तो मेरे प्रिय देश के नेताजी और मंत्री महोदय मैं आपको सलाह देना चाहूँगा की पब्लिक तो पब्लिक है कम से कम आप तो सावधान रहे । आगे से अगर आप कभी भी प्रेस मीटिंग रखते है तो कृपया ध्यान से अपने सिक्यूरिटी वालों से कह कर के सभी पत्रकार बंधू लोगो का जूता बाहर ही निकलवा ले , क्या पता कौन किधर से जूता चला दे कौनो भरोसा है आज कल के ज़माने का और तो और चुनाव सर पर है।
मेरे देश के बुजुर्ग और बुद्धजीवी नेता गड नमस्कार।
बचपन मैं एक फ़िल्म देखी थी , जिसमे खलनायक अपने एक चमचे, से एक ऑफिसर को पटाने के लिए कहता है की उस ऑफिसर को चाँदी का जूता मारो और फिर भी काम न बने तो उसे सोने का जूता मारो ..काम बनेगा /
लेकिन ये क्या इराक वालों ने तो चमडे के जूते से ही काम काम चलाना चालू कर दिया। जूता और जूता मारने वाला दोनों ही दुनिया मे प्रसिद्ध हो गए । जूता कई लोगो को अमीर बना गया ।
जूते तेरे क्या नखरे
अभी कुछ दिन पहले जूता चीन मैं भी चला और आज उस जूते की तारीफ मैं कुछ कसीदे यूरोप के एक छोटे से देश मैं भी पढ़े गए ।
तो मेरे प्रिय देश के नेताजी और मंत्री महोदय मैं आपको सलाह देना चाहूँगा की पब्लिक तो पब्लिक है कम से कम आप तो सावधान रहे । आगे से अगर आप कभी भी प्रेस मीटिंग रखते है तो कृपया ध्यान से अपने सिक्यूरिटी वालों से कह कर के सभी पत्रकार बंधू लोगो का जूता बाहर ही निकलवा ले , क्या पता कौन किधर से जूता चला दे कौनो भरोसा है आज कल के ज़माने का और तो और चुनाव सर पर है।
Friday, January 23, 2009
ओबामा ने ली दुबारा शपथ
देखा ये हुई न बात , जरा से गलती हुई नही की दुबारा शपथ ही ले ली।
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के शपथ ग्रहण समारोह में मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश से हुई चुक की वजह से बुधवार को उन्हें फिर से दुबारा शपथ लेनी पड़ी । हमारे हिंदुस्तान के अन्दर तो न जाने हमारे बुजुर्ग नेतावों ने कितनी बार शपथ ली है लेकिन उनसे आज तक कभी भी शपथ समारोह मैं कोई गलती नही हुई है। हाँ वो अलग बात है की शपथ समारोह के ख़त्म हो जाने के बाद नेतावों की दिमाग की मेमोरी खतम हो जाती है। हमारे देश मैं शपथ समारोह तो बस एक समारोह ही है जो की एक समारोह तक ही सिमित रह जाता है , उसके बाद तो हमारे देश के नेता लोग उस शपथ को याद रखते है जो शपथ राजनीती मैं उतरते समाया लिया होता है।
महान है आप ओबामा जी जोकि आपने इस गलती को समय रहते ही सुधर लिया /
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के शपथ ग्रहण समारोह में मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश से हुई चुक की वजह से बुधवार को उन्हें फिर से दुबारा शपथ लेनी पड़ी । हमारे हिंदुस्तान के अन्दर तो न जाने हमारे बुजुर्ग नेतावों ने कितनी बार शपथ ली है लेकिन उनसे आज तक कभी भी शपथ समारोह मैं कोई गलती नही हुई है। हाँ वो अलग बात है की शपथ समारोह के ख़त्म हो जाने के बाद नेतावों की दिमाग की मेमोरी खतम हो जाती है। हमारे देश मैं शपथ समारोह तो बस एक समारोह ही है जो की एक समारोह तक ही सिमित रह जाता है , उसके बाद तो हमारे देश के नेता लोग उस शपथ को याद रखते है जो शपथ राजनीती मैं उतरते समाया लिया होता है।
महान है आप ओबामा जी जोकि आपने इस गलती को समय रहते ही सुधर लिया /
Tuesday, December 30, 2008
राजेंद्र यादव जी की चाहे आलोचना करी जाए या तारीफ वो तो जो कहना था कह गए, लेकिन सही नही बोले वो श्रीमान जी, यादव जी आप ख़ुद एक बहुत ही सम्मानिया पुरूष है , हमसे जयादा दुनिया देखी है आपने। क्या आप नही चाहेंगे की आने वाली पीढी आप के बारे मैं जाने , कैसे भुला सकते हैं हम अपने इतिहाश को, आपने जो भी कहा मैं ख़ुद उससे सहमत नही हूँ और मुझे ये भी पता है की मेरे सहमत होने या न होने से आपके उपर कोई फर्क भी पड़ेगा ।
तारकेश्वर गिरी
Monday, December 22, 2008
बड़ा अजीब जमाना है
बड़ा अजीब जमाना है, आज कल का, अभी कल की बात है मैं कलर चैनेल पर एक प्रोग्राम देख रहा था प्रोग्राम को छोटे-छोटे बच्चे प्रेजेंट कर रहे थे \
एक छोटी सी बच्ची मंच पर आती है और अपना प्रोग्राम चालू करती है,उस बच्ची का प्रोग्राम बिल्कुल ही फूहड़ होता है ,लेकिन उस समय बच्ची के माँ और बाप बड़े ही चटकारे ले ले कर के उसके प्रोग्राम को देखते है, उस दौरान उस प्रोग्राम मैं उपस्दिथ आयोजक भी बड़े ही मजे ले ले कर उस प्रोग्राम का आन्नद लेते हैं, लेकिन मेरे जैसा दर्सक उस प्रोग्राम को देख कर के इतना दुखी होता की बस क्या बतावूँ ,मेरा तो दिमाग ख़राब हो गया की हे प्रभु ये आज कल के कैसे माता और पिता है जी इस छोटी सी उम्र मैं अपने बच्चो को सेक्स का पाठ पढ़ा कर मंच पर प्रस्तुत कर रहें है।
किधर गया वो हमारा संस्कार जब हम अपने बच्चो को अपनी संस्कृत के बारे मैं बताना चालू करेंगे .
एक छोटी सी बच्ची मंच पर आती है और अपना प्रोग्राम चालू करती है,उस बच्ची का प्रोग्राम बिल्कुल ही फूहड़ होता है ,लेकिन उस समय बच्ची के माँ और बाप बड़े ही चटकारे ले ले कर के उसके प्रोग्राम को देखते है, उस दौरान उस प्रोग्राम मैं उपस्दिथ आयोजक भी बड़े ही मजे ले ले कर उस प्रोग्राम का आन्नद लेते हैं, लेकिन मेरे जैसा दर्सक उस प्रोग्राम को देख कर के इतना दुखी होता की बस क्या बतावूँ ,मेरा तो दिमाग ख़राब हो गया की हे प्रभु ये आज कल के कैसे माता और पिता है जी इस छोटी सी उम्र मैं अपने बच्चो को सेक्स का पाठ पढ़ा कर मंच पर प्रस्तुत कर रहें है।
किधर गया वो हमारा संस्कार जब हम अपने बच्चो को अपनी संस्कृत के बारे मैं बताना चालू करेंगे .
Wednesday, September 10, 2008
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