Sunday, March 7, 2010

विश्व की सबसे गन्दी नदी -यमुना नदी.

शायद ये सच हो, की यमुना पुरे विश्व की सबसे गन्दी नदी हो, या सबसे बड़ा नाला कह सकते हैंवैसे देखा जाय तो यमुना नदी इतनी गन्दी भी नहीं हैंक्योंकि अगर इतनी गन्दी होती तो शायद आधी दिल्ली प्यासी ही रहती , मगर फिर भी गन्दी हैं, सालो -साल तक करोडो रुपये खर्च कर दिए जाते हैं गंदे नाले के पानी को साफ करने के बहाने

वजीराबाद तक यमुना का पानी बिलकुल साफ है पीने लायक , मगर वजीराबाद के तुरंत बाद यमुना नदी से गंदे नाले की बू आने लगती है, उसकी वजह वजीराबाद और मजनू के टीले के पास यमुना में मिलता गन्दा नालासबसे पहले दिल्ली में यमुना इधर ही मैली होती हैंऔर सरिता विहार तक पूरी तरह से बर्बाद हो जाती हैं

यमुना नदी को तो वजीराबाद में हो रोक कर के रखा गया है, इधर तो सरिता विहार तक यमुना नाला हैउस नाले की सफाई में सरकार हजारो करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है और पता नहीं कितने करोड़ और खर्च होंगे

सरकार को चाहिए की यमुना नदी के किनारे-किनारे सफेदा और बबूल जैसे ज्यादा पानी पीने वाले पेड़ लगाने चाहिए ये पेड़ यमुना का गन्दा पानी हजारो लीटर रोज ख़त्म करते रहेंगे

Saturday, March 6, 2010

सलीम खान और उमर कैरानवी साहब का सच.

बड़े बेआबरु होकर 'हमारी अन्जुमन' से हम निकलें।

ये सिर्फ नकारात्मक सोच का ही परिणाम है की एक ब्लोगेर पाकिस्तान मैं हुए सिखों की हत्या के विरोध मैं कुछ लिखता तो उसी के समाज के लोग उसके ब्लॉग का बहिस्कार करते हैं और बाद मैं धार्मिक ब्लॉग का हवाला देते हुए माफ़ी भी मांगते हैं। लेकिन इससे हमारी अंजुमन के करता धर्ता श्रीमान सलीम खान और श्रीमान उमर साहेब के विचारो के बारे मैं लोगो को पता चलता है की, एक भारतीय मुस्लमान होते हुए इन लोगो को ये तकलीफ हुई है कोई पाकिस्तानी सिखों के बारे मैं इतने सहानिभूति भरी बीतें कैसे कर रहें है । उसका परिणाम श्रीमान सिद्दीकी साहेब के सामने है।
http://haqbaat.blogspot.com/2010/03/blog-post.html

Thursday, March 4, 2010

गरीबी और सोनिया गाँधी।

गरीबी और सोनिया गाँधी। :- सोनिया जी ने अपने लिए कभी तेल साबुन तो ख़रीदा नहीं उन्हें क्या पता मंहगाई क्या होती हैमुफ्त का खाना खाती हैं और मुफ्त के मकान मैं रहती हैंफ़ोन का बिल देना नहीं हैघर से बिजुली कभी जाती नहीं , गाड़ी भी मुफ्त मैं मिली है , और गाड़ी ही क्या ये तो हवाई जहाज से भी मुफ्त मैं ही चलती हैंकभी अपने हाथ से रोटी पकाए तब तो पता चलेगा की आटे का भाव क्या हैचाय पीती नहीं क्योंकि, वैध जी ने मना किया है , और वैसे भी शरद पावर जी की इतनी सारी चीनी मिले हैं, उन्हें चीनी खरीदने की क्या जरुरत है
कभी किसी नेता (राष्ट्रीय स्तर ) या मंत्री से पूछिए की गैस सिलिंडर का वजन कितना होता है, कसम से बता रहूँ उसे पता ही नहीं होगा

गरीबी के बारे मैं पता करना हो तो जमीन पर आईये

Wednesday, March 3, 2010

मुसलमान और अरबी संस्कृत -2

आज मैं फिर पुराने मुद्दे को नए तरीके से ले कर आया हूँ , अच्छा लगे या बुरा कृपया अपनी राय जरुर दीजियेगा।

मुसलमान और अरबी संस्कृत

हिन्दू एक धर्म नहीं बल्कि एक सभ्यता हैबिहार मैं लिट्टी चोखा , पंजाब मैं मक्के की रोटी सरसों दा साग, तो बंगाल मैं मछली चावललेकिन मुसलमान बिना मांस खाए जिन्दा नहीं रह सकताउत्तर भारत मैं हर घर मैं रोटी बनती है लेकिन दक्षिण भारत मैं रोटी या पूरी कभी -कभी बनती हैलेकिन मुसलमान तंदूर की रोटी खाता हैक्योंकि अफगानिस्तान ,इराक , इरान मैं रोटी घर -घर नहीं बनती , सिर्फ दुकानों पर बनती हैकुछ मुसलिम देशो मैं तवे की रोटी खाई जाती है , लेकिन उलटे तवे की , क्योंकि कबीलाई मुसलमान रेगिस्तानो मैं रहा करे थे जंहा पर हमेशा तेज हवा चला करती है, इस लिए उन देशो के निवाशी रोटी बनाते समय तवे को उल्टा रखते थे जिस से आग जलती रहे, लेकिन आज पुरे भारत के मुसलमान अपने -अपने घरो मैं उलटे तवे पर रोटी बनाते हैं।

मुसलमान औरते बुरका पहनती है उसका सिर्फ एक ही उद्दयेश है की अरब देश मैं लोग कबीले मैं रहा करते है थेऔर एक कबीला दुसरे कबीले को कभी भी पसंद नहीं करता थाखास कर के सुन्दर औरतो के मामले मैं , औरत सुन्दर दिखी नहीं की लड़ाई शुरू, इस लिए परदा प्रथा शुरू हुई,

पर्दा प्रथा अरब सभ्यता की देन है

हिन्दू और मुस्लमान दोनों इस ग्रह के प्राणी नहीं हैं.

हिन्दू और मुस्लमान दोनों इस ग्रह के प्राणी नहीं हैंये दोनों तो किसी और ग्रह से इम्पोर्ट किये गए हैंहिन्दू किसी और ग्रह से टपके हुए हैं तो मुस्लमान किसी और ग्रह से आकर केदोनों मैं जरा सा भी समानता नहीं हैहिंदुवो के दो हाथ हैं तो मुसलमानों के चारमुस्लमान दो पैरो वालें प्राणी है तो हिंदुवो के पास तीन पैर हैहिन्दू और मुसलमानों के बीच ढेर सारी भिन्नतायें हैंएक पानी पिता है तो दूसरा जल पिता है, एक भोजन करता है तो दूसरा खाना खाता हैएक का खून लाल है तो दुसरे का खून महरूम है
कोई किसी को समझने की कोशिश नहीं करता , बस एक दुसरे की और ऊँगली उठाने पर लगे हुए हैंऔर मैं तो ये समझता हूँ की चाहे कितनी भी कोशिश कर ली जाय दो नो को समझाने के लिए कोई फायदा नहीं हैदोनों एक दुसरे की संस्कृति और सभ्यता को नष्ट करने मैं लगे हुए हैं
इसका एक ही आसन सा रास्ता है दोनों को वापस इनके -इनके ग्रहों पर भेज दिया जाय

Thursday, February 25, 2010

मुसलमान और अरबी संस्कृत.

मुसलमान और अरबी, बिलकुल सही बात है , मुसलमान दुनिया के किसी भी कोने में रहे, सिर्फ अरबी सभ्यता को मानता है। खास करके भारतीय मुसलमान , जिनकी इज्जत बाकि मुष्लिम देश नहीं करते। वो भारतीय मुसलमान अपने आप को भारतीय संस्कृत और सभ्यता से दूर करते जा रहे हैं. हमारे देश के मुसलमान ये भूल रहे हैं की वो भारतीय हैं।
और येही वजह है की भारत में मुसलमान आज भी पीछे हैं.

चाहे कितने भी मुसलमानों को मारो, मुस्लमान रोज बढेगा.

चाहे जो कर लो , आतंक वाद का सहारा लेकर कर के, जितने मर्जी मुसलमान मारो, नया मुसलमान रोज पैदा होगा.
ये कहना है श्रीमान डॉ जाकिर नाइक का
Peace T. V. के एक प्रोग्राम मैं डॉ नाइक धर्म परिवर्तन करा रहे थे , जगह थी , Azam Campus , Pune. लेकिन क्या जाकिर साहेब ये बता सकते हैं की धर्म परिवर्तन इतना जरुरी क्यों हैऔर अगर इतना ही जरुरी है तो उन कट्टरपंथियों का दिमाग और दिल परिवर्तन क्यों नहीं करते जो की इस्लाम के नाम पर कलंक हैरोज सैकड़ो लोग मारे जा रहे है, शिया और सुन्नी के नाम रोजाना कत्ले आम किया जा रहा है. पर उनका दिल परिवर्तन क्यों नहीं करतेदो सिखों का सर कलम कर दिया , उनकी क्या गलती थी , क्या वो इन्सान नहीं थेमुस्लमान अगर अपने धर्म का इतना ही कट्टर है तो क्या धर्म सिर्फ सजा देने के लिए होता है
मुझे तो लगता है की डॉ नाइक के पूर्वजो ने डॉ नाइक को हिन्दू परिवार मैं पैदा कर के ही गलती की हैडॉ नाइक को भारत से कोई प्यार नहीं है उन्हें सिर्फ अपने धर्म से प्यार हैनाइक के अन्दर से देश भक्ति नहीं बल्कि गद्दारी की बू आती हैअपने ही संस्कार और अपनी ही संस्कृत बेच खाई है डॉ नाइक नेडॉ नाइक, अगर अपने आप को इतना बड़ा विद्वान समझते है तो धर्म के साथ -साथ अपनी भारतीय संस्कृत का भी प्रचार करतेलेकिन नहीं उन्हें तो अरबियन संस्कृत से प्यार हो गया है