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Wednesday, March 3, 2010

मुसलमान और अरबी संस्कृत -2

आज मैं फिर पुराने मुद्दे को नए तरीके से ले कर आया हूँ , अच्छा लगे या बुरा कृपया अपनी राय जरुर दीजियेगा।

मुसलमान और अरबी संस्कृत

हिन्दू एक धर्म नहीं बल्कि एक सभ्यता हैबिहार मैं लिट्टी चोखा , पंजाब मैं मक्के की रोटी सरसों दा साग, तो बंगाल मैं मछली चावललेकिन मुसलमान बिना मांस खाए जिन्दा नहीं रह सकताउत्तर भारत मैं हर घर मैं रोटी बनती है लेकिन दक्षिण भारत मैं रोटी या पूरी कभी -कभी बनती हैलेकिन मुसलमान तंदूर की रोटी खाता हैक्योंकि अफगानिस्तान ,इराक , इरान मैं रोटी घर -घर नहीं बनती , सिर्फ दुकानों पर बनती हैकुछ मुसलिम देशो मैं तवे की रोटी खाई जाती है , लेकिन उलटे तवे की , क्योंकि कबीलाई मुसलमान रेगिस्तानो मैं रहा करे थे जंहा पर हमेशा तेज हवा चला करती है, इस लिए उन देशो के निवाशी रोटी बनाते समय तवे को उल्टा रखते थे जिस से आग जलती रहे, लेकिन आज पुरे भारत के मुसलमान अपने -अपने घरो मैं उलटे तवे पर रोटी बनाते हैं।

मुसलमान औरते बुरका पहनती है उसका सिर्फ एक ही उद्दयेश है की अरब देश मैं लोग कबीले मैं रहा करते है थेऔर एक कबीला दुसरे कबीले को कभी भी पसंद नहीं करता थाखास कर के सुन्दर औरतो के मामले मैं , औरत सुन्दर दिखी नहीं की लड़ाई शुरू, इस लिए परदा प्रथा शुरू हुई,

पर्दा प्रथा अरब सभ्यता की देन है

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