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Saturday, March 6, 2010

सलीम खान और उमर कैरानवी साहब का सच.

बड़े बेआबरु होकर 'हमारी अन्जुमन' से हम निकलें।

ये सिर्फ नकारात्मक सोच का ही परिणाम है की एक ब्लोगेर पाकिस्तान मैं हुए सिखों की हत्या के विरोध मैं कुछ लिखता तो उसी के समाज के लोग उसके ब्लॉग का बहिस्कार करते हैं और बाद मैं धार्मिक ब्लॉग का हवाला देते हुए माफ़ी भी मांगते हैं। लेकिन इससे हमारी अंजुमन के करता धर्ता श्रीमान सलीम खान और श्रीमान उमर साहेब के विचारो के बारे मैं लोगो को पता चलता है की, एक भारतीय मुस्लमान होते हुए इन लोगो को ये तकलीफ हुई है कोई पाकिस्तानी सिखों के बारे मैं इतने सहानिभूति भरी बीतें कैसे कर रहें है । उसका परिणाम श्रीमान सिद्दीकी साहेब के सामने है।
http://haqbaat.blogspot.com/2010/03/blog-post.html
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