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Tuesday, March 22, 2011

और कितना इंतजार करूँ. ------तारकेश्वर गिरी.

और कितना इंतजार करूँ ,
किस हद तक डूब जावूँ
तेरा प्यार पाने के लिए.

आज भी याद हैं वो पल
जब मिले थे पहली बार,
तेरे इंतजार में , सड़क पर.

लम्हा -लम्हा वक्त गुजर गया
हम चलते रहे साथ उनके,
बस उनके इंतजार में.

आज भी साथ हैं वो
मगर दूर से,
इंतजार में , मैं खड़ा.

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