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Tuesday, October 19, 2010

शरीफ खान जी- एक मुसलमान बन करके नहीं एक इन्सान बन करके सोचिये- तारकेश्वर गिरी.

आदरणीय शरीफ खान जी चरण स्पर्श।
मान्यवर बुजुर्ग महोदय , मुझसे कंही ज्यादे दुनिया देखि हैं आपने , बहुत करीब से आपने बहुत से दंगो को देखा होगा, हर धर्म के लोग आपके साथ होंगे।
लेकिन श्रीमान जी ये भी सत्य हैं कि http://haqnama.blogspot.com/2010/10/definition-of-terrorism-sharif-khan.html
आतंकवाद का नाम आते ही इस्लाम सामने आ जाता हैं। लड़ाई झगडे तो हर समाज और हर धर्म में होते हैं, और कभी - कभी भयानक भी हो जाते हैं, लेकिन अगर वोही लड़ाई झगडे अगर इस्लाम से जुड़े हो तो सदैव भयानक ही होगा।
श्रीमान जी अगर भारत भी इस्लामिक देश होता तो शायद आप और आप का पूरा कुनबा इतना सुरक्षित नहीं होता जितना कि आज आप हैं। पाकिस्तान , अफगानिस्तान , इराक में आज हालत ये हैं कि मुसलमान मस्जिद में नमाज पढने से डरता हैं। कब कौन सा आदमी मानव बम हो और कितनो को अपने साथ उडा ले जाये पता नहीं।
भारत के अन्दर जितने दंगे हिन्दू और मुसलमानों के बीच हुए हैं उनसे ज्यादा दंगे शिया और सुन्नी के बीच रोज होते हैं।
आप कहते हैं कि बाबरी मस्जिद गिरा करके लोगो ने गलत किया।
आतंक कि शुरवात तो खुद मुस्लिम आक्रमण कारियों ने कि हैं, क्यों भूल गए आप जब तैमुर लंग ने पूरी दिल्ली को आग के हवाले कर दिया था। क्यों भूल रहे हैं आप कि हिंदुस्तान में जितने भी मस्जिदे उस ज़माने में बनाई गई थी या तो मंदिर कि जगह या मंदिर के मलवे को इस्तेमाल कर के ही बनाई गई थी।
कभी मौका मिले तो दिल्ली कि कुतुबमीनार देखने जरुर जाइएगा, तब आप को पता चलेगा कि आप के पूर्वजो ने कितनी अच्छी जमीन आप लोगो के लिए तैयार कि हैं। पुरे कुतुबमीनार कि दिवालो और आस पास के भवनों पर आप को आज भी हिन्दू और जैन देवी - देवातावो कि तस्वीर नजर आ जाएगी।
कुछ बुरा लगा हो तो बच्चा समझ कर के माफ़ कर दीजियेगा। क्योंकि हमारी संस्कृति हमें बड़ो कि इज्जत करना सिखाती हैं।
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