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Thursday, August 12, 2010

ये राजधानी हैं मेरे देश की - तारकेश्वर गिरी

हर तरफ शोर हैं ,ये राजधानी हैं मेरे देश की ।
कुछ को छोड़कर सारे नेता और अधिकारी चोर हैं,
ये राजधानी हैं मेरे देश की।


सड़क पे बने गड्डे हैं , नाले भरे पड़े हैं ,
ये राजधानी हैं मेरे देश की।
रोटी- तेल मंहगा हैं फ़ोन पेलम- पेल सस्ता हैं ,
ये राजधानी हैं मेरे देश की ।


रोज सड़क खुदती हैं सालो तक के लिए
नए टेंडर के इंतजार में,
ये राजधानी हैं मेरे देश की।
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