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Sunday, July 18, 2010

प्रेम कि हद क्या होती है -तारकेश्वर गिरी.

प्रेम कि हद क्या होती है, आज सुबह - सुबह जब सो कर के उठा तो पता नहीं कंहा से अचानक ख्याल आया कि आखिर किस हद तक किया जा सकता ही प्यारप्यार एक ऐसा शब्द जिसको बोलने मात्र से सुखद आनंद कि प्राप्ति हो जाती है

प्रभु से प्यार, माता - पिता से प्यार, भाई-बहन से प्यार , पत्नी से प्यार, प्रेयशी से प्यार, बच्चो से प्यार, रिश्तेदारों से प्यार, दोस्तों से प्यार , जानवरों से प्यार, प्रकृति से प्यार - और ना जाने किस -किस से प्यार

लेकिन मतलब तो देखिये हर प्यार का मतलब अलग- अलग होता हैकई जगह तो प्यार सिर्फ मतलब के लिए किया जाता है, तो कई जगह जानबूझ कर के दिखावे के लिए किया जाता है प्यार

प्रभु का प्यार आनंद कि प्राप्ति करवाता हैमाता-पिता , भाई-बहन, पत्नी, बच्चो, रिश्तेदारों और दोस्तों का प्यार सामाजिक बन्धनों में जकड़े रहने कि अनिवार्यता दर्शाता हैं जानवरों और प्रकृति का प्यार सबको साथ ले कर के चलने कि दिशा दिखता हैमगर प्रेयशी का प्यार क्या कहलाता है

क्योंकि आज के ज़माने में जंहा भी प्यार शब्द का इस्तेमाल हुआ , कुछ लोग तो बस येही कहेंगे कि बेटा तू तो गया काम सेप्रेयशी के प्यार ने अगर आगे चल कर के किसी रिश्ते का रूप ले लिया तो ठीक नहीं तो उसका क्या होता हैबेचारे दो प्रेमी

एक छोटी सी घटना का जिक्र कर रहा हूँ :- मेरे एक मित्र हैं जो कि शादी शुदा हैं, उनकी दोस्ती एक लड़की से पिछले १० सालो से चल रही हैदोस्ती का मतलब सिर्फ दोस्ती ही हैऔर मुझे भी इतना पक्का पता है कि दोनों कि दोस्ती में सचमुच एक ऐसा प्रेम झलकता है जिसकी कल्पना भी नहीं कि जा सकतीक्योंकि दिल्ली जैसे शहर में अगर कोई लड़का या आदमी किसी लड़की से दोस्ती या प्रेम करता है तो उसका मतलब सिर्फ प्रेम ही नहीं बल्कि शारीरिक संबंधो से भी होता हैमगर ये मेरे परम मित्र महोदय आज भी शारीरिक संबंधो से दूर दोस्ती के संबंधो को निभा रहे हैंउनकी ये दोस्ती भी काफी पुरानी होने कि वजह से काफी मजबूत है

ऐसे रिस्तो को क्या नाम देंगे , क्या ये सही है


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