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Wednesday, July 14, 2010

आखिर धर्म परिवर्तन जरुरी क्यों है ? - तारकेश्वर गिरी.

हमारे देश मैं जो भी धर्मपरिवर्तन कि गतिविधियाँ चल रही हैं, उसे देख कर येही लगता है कि धर्म परिवर्तन आस्था के साथ - साथ लालच के लिए भी किया जा रहा है. गाज़ियाबाद के विजय नगर में इसाई मशीनरियां आज भी पैसे के बल पर धर्म परिवर्तन करवा रही हैं. और वो भी मात्र ३ लाख रुपये में. गरीब और पिछड़े हुए लोग इसमें बढ़ चढ़ करके भाग ले रहे हैं. पैसे के साथ - साथ उन्हें तुरंत चमत्कार का लालच भी दिया जा रहा है. आज भी अगर आप सुबह - सुबह टी वी खोल कर के देखे तो उसमे कैसे - कैसे चमत्कार दिखा कर के लालच दिया जाता है कि आप अपना धर्म परिवर्तन करले.


रही बात इस्लाम कि तो आज कुछ लोग मात्र २ पत्नी या दो शादी करने के चक्कर में इस्लाम कबूल कर रहे हैं.


लेकिन आखिर सवाल ये है कि क्या धर्म परिवर्तन से लाभ है. हर धर्म के विद्वान लोगो का येही कहना है कि सभी धर्म सही रास्ता दिखलाते हैं , ईस्वर एक है, चाहे आप उसे अल्ल्लाह के नाम से पुकारे या चाहे शिव के नाम से या गोंड कहे या बुद्ध या भगवान महावीर या वगैरह - वगैरह. क्या फर्क पड़ता है.


हिंदुस्तान में धर्म परिवर्तन का मूल कारण रहा है , यंहा कि जाती व्यस्था या उंच -नीच का माहौल . पुरे देश में पंडितो ने जाती व्यस्था को इतना कठिन बना दिया कि निचले वर्ग के लोगो का शोषण होने लगा. और इसी का फायदा उठाया इसाई मशीनरियों ने.

डॉ भीम राव आंबेडकर ने अपने को बुधिष्ट कहा और बौध धर्म को अपनाया , उनके समर्थन में लगभग पूरा का पूरा हरिजन समाज बौध धर्म ग्रहण कर चूका है. और आज हालत ये है कि भारत में बौध धर्म एक जाती विशेष का धर्म बन कर के रह गया है. उत्तर प्रदेश कि मुख्यंत्री ने पुरे उत्तर प्रदेश में डॉ भीम राव आंबेडकर जी , कांशी राम जी, और खुद कि मूर्तियों का विशाल जाल बिछा दिया है. पूरा का पूरा उत्तर प्रदेश आंबेडकर मय हो गया है. लेकिन उसके परिणाम कुछ अलग ही दिख रहे हैं , डॉ भीम राव कि मूर्तियाँ खुले रूप में आसमान के नीचे खड़ी पड़ी है. एक संविधान निर्माता कि ये हालत. पूरा का पूरा हरिजन समाज सिर्फ आंबेडकर , कांशी राम जी कि मूर्तियों को सँभालने में व्यस्त है. और सरकार अपने आप को. आज का हरिजन समाज पहले से भी ज्यादा बुरी स्थिति में पहुँच चूका है. जब कि आज के आधुनिक समाज में सभी वर्ग के लोगो ने आपस में घुलना - मिलना शुरू कर दिया है. कौन हरिजन , कौन ब्राहमण और कौन मुस्लमान . जब तक अपनी पहचान खुद ना बताये तब तक आप पता नहीं लगा सकते और ये व्यस्था आगे चल कर के और नजदीकियां लाएगी.

लेकिन आखिर धर्म परिवर्तन कि जरुरत है क्यों. मेरे समझ से तो धर्म परिवर्तन सिर्फ कायर लोग करते हैं , जो अपने समाज को सुधारने कि बजाय किसी और समाज को अपना लेते हैं. अगर किसी परिवार में माता - पिता कि भूमिका संदिग्ध लगे तो क्या माता- पिता का साथ छोड़ कर के किसी और को अपना माता - पिता बना लेना उचित है, या अपने माता - पिता रूपी समाज को सुधारना उचित है. ये गारंटी कौन लेगा कि धर्म परिवर्तन करने बाद उसकी स्थिति सुधार जाएगी. अगर इस बात कि गारंटी होती तो सभी के सभी अपना धर्म बदल चुके होते. और आज का पूरा भारत देख रहा कि जो लोग हिन्दू धर्म को छोड़ करके गए हुए हैं वो आज भी उसी तरह से जी रहे हैं जिस तरह से बाकि हिन्दू समाज.

बल्कि धर्म परिवर्तन से हिंदुस्तान को नुकसान ही हुआ है. आज का भारतीय समाज अलग- अलग धर्म को अपना करके एक दुसरे से अलग हुआ पड़ा है. और कंही - कंही तो एक दुसरे कि जान के दुश्मन बने पड़े हुए है.
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