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Tuesday, June 8, 2010

प्यार का सन्देश -मौलाना वहीदुद्दीन खान - तारकेश्वर गिरी -2


अगर कोई इन्सान प्यार करता है तो ऐसा तभी हो पाता है जब उसके अन्दर सब्र (सहनशीलता) नाम की चीज विद्दमान हो। सहनशीलता ही इन्सान को पुरे जीवन में सुख और समृधि प्रदान करती है।



हम सभी लोग वेस्ट निजामुद्दीन के उस स्थान पर पहुँच गए, अन्दर घुसते ही देखा की मौलाना साहेब एक कुर्सी पर बैठे हुए हैं। बिलकुल शांत स्वभाव , शांत वातावरण । तभी कुछ लोग मेरे पास आये , अनवर जमाल जी ने सबसे मेरा परिचय करवाया , उन्ही में से एक थे श्रीमान रजत मल्होत्रा जी , जो हर समय मौलाना जी के साथ थे। मैंने जब चारो तरफ नजर दौड़ा करके देखा , तो हर तरफ मुझे और २ या तीन लोगो को छोड़ कर के बाकि सभी मुस्लिम समुदाय के लोग ही नजर आये। लेकिन सबसे आश्चर्य की जो बात थी वो ये की मौलाना जी की क्लास में महिलाये बिना बुर्के की थी, कुछ महिलावो ने तो जींस तक पहन रखा था। लेकिन उनके अन्दर शालीनता और लज्जा कूट - कूट कर के भरी दिख रही थी । शाहनवाज भाई ने मेरी तरफ बड़े ही आश्चर्य से देखा और कहा , गिरी भाई .... इधर तो बुर्के का रिवाज ही नहीं है। परेशान तो में भी हो गया था , की एक मौलाना की क्लास में बिना बुरका पहने औरते बैठी हुई हें।



खैर थोड़ी देर में मौलाना जी की आन लाइन क्लास का दौर शुरू हुआ।


उनका विषय था सब्र (सहनशीलता) :- उन्होंने कहा की भारत की आज़ादी के दौरान महात्मा गाँधी जी ने सहनशीलता (सब्र) का परिचय दिया और उसका नतीजा ये है की आज हम आजाद हें। उसी दौरान उन्होंने पाकिस्तान के बारे में कहा की , पाकिस्तानी जनता और पाकिस्तानी नेतावो में सब्र (सहनशीलता) नाम की चीज नहीं है। इसी वजह से वो लोग कश्मीर को लेकर के अब तक चार बार हिंदुस्तान पर आक्रमण कर चुके हें। और नतीजा पाकिस्तान कर्ज के बोझ से दब गया है। पाकिस्तान अगर भारत के साथ मिलकर के चलता तो आज भारत और पाकिस्तान दोनों के बीच अच्छा खासा ब्यापार होता।


तलाक के ऊपर बोलते हुए मौलाना ने कहा की अगर किसी वजह से आपको अपनी बीबी को तलाक देना पड़े तो सब्र से काम ले । गुस्से में इन्सान दूसरो के साथ -साथ अपना भी नुकसान करता है। तलाक हमेशा गुस्से और नासमझी का नतीजा होता है। अगर aapne एक बार तलाक बोल दिया है तो दूसरी बार तलाक शब्द का इस्तेमाल कम से कम एक महीने बाद करे। इस से आपको और आपकी पत्नी को सोचने का वक्त मिल जायेगा और शायद तीसरी बार तलाक ना बोलना पड़े।



बाकि कल फिर।


आपको ये लेख कैसा लग रहा है बताइयेगा जरुर।


आज मेरी shadi की shalgirah bhi hai, aur mujhe unko mandir le kar ke jana hai. isliye baki kal. unka mijaj garam na hojaye.


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