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Tuesday, October 25, 2011

दीपावली पे धोखा


दीपावली , जिसका इंतजार हर भारतीय को रहता हैं. ढेरो उपहार, मिठाइयाँ , पटाखे घर कि साफ- सफाई, घर कि सजावट, और बहुत कुछ.

लेकिन अफ़सोस तब होता हैं, जब मिलावटी सामानों के पकडे जाने कि खबर हम तक पहुँचती हैं. लेकिन आश्चर्य भी , कि सिर्फ त्योहारों पर ही क्यों. क्या बाकि समय सही सामान मिलता हैं. दीपावली आते ही शहरों के साथ -साथ गाँवो में भी दुकानों पे रौनक सी छा जाती हैं. जनता दीपावली कि तैयारी में मस्त तो मिलावट खोर मुनाफा खोरी में व्यस्त . इसमें भी लगता हैं कि किसी विदेशी ताकतों का हाथ हैं या हमारा पडोशी देश हमारे खाने -पीने कि चीजो में मिलावट कर रहा हैं.

मैं तो आप सभी से निवेदन करता हूँ कि ईस दीपावली पे दुकान से मिठाई ना ख़रीदे . और बीमार होने से बचे और अपने रिश्तेदारों को भी बचाए . मिठाई कि जगह फल , मेवे या बहुत मीठा खाने का मुड हो तो खजूर खांए और जो सेहत के लिए सेहतमंद भी साबित होगा.

देशी घी का दीपक जलाना बंद करदे (बाजार से ख़रीदे गये ). क्योंकि जिस देशी घी का इस्तेमाल आप अपने पूजा घर में कर रहे हैं, उसको तैयार करते समय उसमे जानवरों कि चर्बी का इस्तेमाल किया गया हैं. गाजीपुर (दिल्ली) के बुचड खाने में काम करने वाले मेरे एक मित्र ने बताया कि जानवरों कि चर्बी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल शुद्ध देशी को बनाने में किया जाता हैं.

मैंने तो उस दिन से अपने पूजा घर में देशी घी का इस्तेमाल बंद कर दिया हैं . अब में कच्ची घानी के सरसों के तेल का इस्तेमाल दीपक जलाने में करता हूँ.

आप भी करे ... और दुश्मन कि चाल से बचे.
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