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Monday, December 20, 2010

रात भर मुआ सोने न दे..........तारकेश्वर गिरी.

रात भर मुआ सोने न दे....


इंजेक्सन लगावे घडी -घडी।



ये गाना तो मैंने बचपन में सुना था। लेकिन आज इसकी याद तब ताजा हो गई। जब रात कि बात सोचने लगा। अब सोचे भी क्यों नहीं मसला ही कुछ ऐसा था। अब आप खाली इत्मिनान से पढ़िए और हाँ इधर उधर सोचने कि जरुरत नहीं हैं..... ठीक हैं।


हाँ तो में बात कर रहा था उस गाने कि ... रात भर मुआ सोने ना दे इंजेक्सन लगावे घडी -घडी। हुआ ये कि खाना-पीना से फ्री होने के बाद बिस्तर पार लेटा और लेटते ही नीद आ गई।



भाई पूरी रात मच्छरों ने परेशान कर दिया था। पूरी रात सेल इंजेक्सन लगते रहे।

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