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Wednesday, November 24, 2010

हाय रे दिल्ली कि ठंडी। -तारकेश्वर गिरी.

अरे बाप रे वो तो भला हो श्रीमती जी का जो सुबह घर से निकलते ही गाड़ी मैं स्वेटर रख दिया था । आज सुबह से ऑफिस में ही रह गया क्योंकि कंही बाहर जाना ही नहीं था। आज तो जुखाम और सर्दी ने भी मेरा बुरा हाल कर रखा हैं, छींक -छींक के भी बुरा हाल हो चूका हैं।

और हो भी क्यों नहीं , खाली जींस कि पैंट और टी शर्ट पहनूंगा तो येही होगा। बाकि शाम को देखते हैं कि क्या दवामिलती हैं.
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