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Monday, September 13, 2010

तन्हाई में बैठे चुप-चाप, -तारकेश्वर गिरी.

तन्हाई में बैठे चुप-चाप,
उनकी यादो में खोया रहते थे।
जागते हुए भी दिन में,
उनके सपने देखा करते थे।

जमाना बदल गया लोग बदल गये।
यादे बदल गई , तरीके बदल गये।
प्यार का येहशाश वो दीवानगी,
सारे तौर तरीके बदल गये।

उनकी यादो में हम,
आज भी खोये रहते हैं।
ना जाने वो किसकी,
यादो में खोये रहते हैं।
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