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Sunday, April 25, 2010

ना ही कोई हिन्दू देवी -देवता गलत हो सकता है और ना ही पैगम्बर मुहम्मद साहेब गलत हो सकते है और ना ही ईसा मशीह

आदमी वही अच्छा होता है जिसके अन्दर इंसानियत होती है। धर्म वो ही अच्छा होता है जिसके अन्दर समाज को जोड़ने की कला होती है। सिर्फ धार्मिक बनने या वेद कुरान का नारा लगाने वाला इन्सान कभी भी समाज के बारे मैं नहीं सोचेगा। वो तो सिर्फ अपने धर्म के बारे मैं ही सोचेगा। सिर्फ अपने धर्म को ही अच्छा कहेगा।
ना ही कोई हिन्दू देवी -देवता गलत हो सकता है और ना ही पैगम्बर मुहम्मद साहेब गलत हो सकते है और ना ही ईसा मशीह और ना ही वेद और गीता गलत है और ना ही कुरान और बाइबल। सब अपने -अपने ज़माने के महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रन्थ है। उस ज़माने मैं फैली हुई बुराइयों को दूर करने के लिए श्री कृष्ण का अवतार हुआ, ईसा मसीह और पैगम्बर मुहम्मद साहेब का अवतार हुआ। उन लोगो ने उस ज़माने मैं पुरे विश्व के कल्याण के लिए महतवपूर्ण योगदान दिया।
लेकिन आज के ज़माने मैं लोगो को क्या हो गया है। आज के लोग ज्यादा तर अपना समय सिर्फ दुसरे धर्मो को नीचा दिखाने मैं लगाते हैं। कोई कुरान को गलत बताता है तो कोई गीता और वेदों को गलत साबित करने मैं लगा हुआ है। कोई कुरान मैं फेर बदल से मना करता है तो कोई अपना समाज बदलने के लिए तैयार नहीं है।
मेरे पड़ोस मैं एक इसाई परिवार रहता है, किसी काम की वजह से थोड़ी देर पहले वो लोग मेरे पास ही बैठे थे , उसी दौरान उनके एक रिश्तेदार भी मेरे घर आ गए उनके रिश्तेदार ने मुझसे तो नमस्ते किया और उनसे जय मशीह कर के उनका अभिवादन किया। मैं आपका ध्यान जय मशीह शब्द पर दिलाना चाहता हूँ । इसाई समाज जय शब्द को कैसे इस्तेमाल कर रहा है , जबकि जय शब्द तो हिन्दू जाती से मतलब रखता है । लेकिन शायद इसाई धर्म गुरुवो को ये बात पता है की वो हिन्दुस्तानी है और हिन्दुस्तानी सभ्यता उनकी अपनी सभ्यता है। जबकि बाइबिल सिर्फ उस सभ्यता की बात करती जिस सभ्यता मैं उसका जन्म हुआ। लेकिन बाइबिल के उपदेश उनके लिए महत्तवपूर्ण है।
आगे और ................... जल्द ही ...................
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