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Sunday, January 24, 2010

तेरे बाप के पास तो मस्त पटाखा मॉल है न खुद चलाता है न औरो को चलाने देता है

मोहल्ले वाले कहते हैं की तेरे बाप के पास तो मस्त पटाखा मॉल है खुद चलाता है औरो को चलाने देता है (एक छोटी सी बच्ची बोली) .अरे पागल वो सब तो तेरी माँ के बारे मैं कह रहे होंगे उस छोटी सी बच्ची का बाप बोला (मैं आप सभी लोगो से माफ़ी मांगता हूँ इसे लिखना नहीं चाहता था मगर लिखना पड़ा) ये शब्द हैं एक टी वी प्रोग्राम्म मैं एक छोटे से बच्ची की जो गंगुं बाई के रोल मैं सब को हँसाने का काम करती है

काल शाम को बार बार टी वी मैं एड रही थी , मैंने भी ध्यान दिया तो पता चला की वाह रे भारतीय संस्कृत और व्यस्था, सब बड़े मजे से उस छोटी सी बच्ची के द्वारा कहे गए शब्दों के उपर हँसे जा रहे थे, हँसने वाले सब बड़े थे बच्चे नहीं और उस बच्ची के माँ बाप भी थे

उनकी बच्ची इस तरह के शब्दों का सहारा लेकर खूब पैसा कमा रही है, वो छोटी सी बच्ची अपने माँ बाप के लिए रोज कमाती है, इसलिए बच्ची के माँ और बाप तो बड़े मजे से ताली बजा रहे थे, और इस का फायदा टी वी चैनेल भी खूब मजे से उठाते हैं

क्या है ये, बाल मजदूरी या बच्चो को सेक्स पाठ पढाया जा रहा है क्या सरकार इसे बाल मजुदुरी कहेगी या कुछ और.......
क्या इस तरह के शब्द बच्चो के मुंह से अच्छे लगते है।

इस विषय पर मैं आप सबकी राय जानना चाहता हूँअगर विषय अच्छा लगे तो पसंद पर चूहे को जरुर मारिएगा
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