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Wednesday, January 6, 2010

मुसलमान और आतंक- आखिर इतने करीब क्यों

आखिर क्या वजह हो सकती है, इतनी घनिष्टता की, इतने गहरे रिश्ते की (मुसलमान और आतंक), हिंदुस्तान , पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इरान, इराक, यूरोप और अमेरिका अगर परेशान हैं तो सिर्फ और सिर्फ मुसलमान आतंकवादियों से , आखिर क्या वजह हो सकती है, मैं पूछना चाहता हूँ इश्लाम के उन विद्वानों से जो कुरान और इश्लाम मैं गहरी आस्था रखते हैं और बड़ी-बड़ी बाते करते हैं,

क्या कुरान हिंशा की अनुमति देता है, मेरे समझ से नहीं, कोई भी धर्म या कह ले कोई भी धार्मिक पुस्तक हिंशा की अनुमति नहीं देती, धर्म जीने के लिए होता है, जीवन लेने के लिए नहीं, फिर क्यों इतना गहरा रिश्ता हैं ,

इसाई, बुद्धिस्ट, जैन, सिख, हिन्दू धर्मो के धर्म गुरु पुरे संसार मैं घूम घूम कर के शांति का सन्देश देते हैं, जीने का मतलब समझाते हैं, इंसानियत क्या होती , उसे कैसे निभाया जाये उसका मतलब समझाते हैं,

लेकिन इश्लामिक धर्म गुरु तो कुछ अलग ही अंदाज मैं अपने बच्चो को कुरान का मतलब समझाते हैं

ओसामा बिन लादेन ने तालिबान को पैदा किया और इश्लामिक कानून पर जोर दिया और उसका नतीजा आज अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मुसलमान बंधू भुगत रहे हैं। क्या मिला ओसामा बिन लादेन और मुल्ला उमर को, अपनी जिंदगी भी सही तरीके से नहीं जी पा रहे हैं, अफगानिस्तान और पाकिस्तान मैं औरतो की जिंदगी जानवरों से भी बुरी हो गई है। अफगानिस्तान के तालिबानी समाज में तो औरत को सिर्फ और सिर्फ बच्चा पैदा करने की मशीन समझा जाता है।

मुझे तो ये ही लगता है की इश्लामिक धर्म गुरुवो ने इश्लाम के असली स्वरूप को बिगाड़ कर के रख दिया है। Justify Full
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