Thursday, April 8, 2010

आखिर कब तक मुसलमान अपनी पहचान बताता फिरेगा।

आखिर कब तक मुसलमान अपनी पहचान बताता फिरेगाआखिर कब तकक्यों जरुरी है धर्म का प्रदर्शन करना क्या एक हिन्दू अगर अपने माथे पर तिलक नहीं लगाये गा तो क्या वो हिन्दू नहीं कहलायेगाक्या एक मुस्लमान अगर अपने सर पे टोपी नहीं लगाएगा तो क्या वो मुसलमान नहीं कहलायेगाक्या आज के ज़माने में भी जरुरी है की हम लोगो को ये बताये की हमारी जात क्या है ?

डॉ जाकिर नाइक जैसे कुछ आंतकवादी ( होने वाले ) कहते है कि, ये मुसलमानों तुम अपने सर पे टोपी लगावो और लम्बी दाढ़ी रखो जिससे कि अगर कोई तुम्हे देखे तो ये कहे कि देखो वो मुसलमान रहा है

क्या मिला मुसलमानों को मुसलमान बन कर केअपनी पहचान और छुपानी पड़ती है

आखिर क्या जरुरत है अपने - अपने धर्म का प्रदर्शन करने किकुछ लोग इसाई बने और कुछ लोग मुसलमान , लेकिन उनका क्या जो नास्तिक ही रह गएक्या बिगाड़ लिया उनका किसी धर्म ने

मेरे समझ से वो नास्तिक ही हैं जो सबसे मजे कि जिंदगी जी रहे हैं

मुद्दा ये है कि आखिर कब तक मुसलमान अपनी पहचान बताता फिरेगाकब तक मुसलमान अपने आपको सच्चा या कच्चा मुसलमान कहता फिरेगा

सबसे बड़ा मुसलमानों का दुश्मन भी मुसलमान ही है (शिया और सुन्नी )











13 comments:

परमजीत बाली said...

विचारणीय पोस्ट!!

महफूज़ अली said...

आखिर कब तक मुसलमान अपनी पहचान बताता फिरेगा।



यही तो मैं भी कहता हूँ...

Sachi said...

Wonderful post!!!

अज्जु कसाई said...

जब तक तारकेश्‍वर गिरी, तारकेश्‍वर खान नहीं कहलाता तब तक तब तक मुसलमान अपनी पहचान बताता फिरेगा।"

HINDU TIGERS said...
This comment has been removed by the author.
HINDU TIGERS said...

वेचारे मुसलमान के पास और है भी क्या दिखाने को
ये टोपी भी अब मुसलमान की नहीं आतंकवादी वोले तो तालिवान की पहचान बनती जा रही है।
हम तो चाहते हैं कि सबके सब मुसमान टोपी लगाकर ही घूमें ताकि ...

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

सत्य कथन्!!

kunwarji's said...

"आखिर कब तक मुसलमान अपनी पहचान बताता फिरेगा।"

ji ye to doctor sahaab hi bataayenge....

hum to unhi ka intzaar kar rahe hai...

kunwar ji,

Tarkeshwar Giri said...

Guru Aur Chele , dono hi aaj gayab hain.

बवाल said...

क्या कहें जी इस पर।
हमसे तो कुछ कहा ही नहीं जाता। बजा फ़रमाया आपने।

VICHAAR SHOONYA said...

जो हम धारण करते हैं वही धर्म है। इस बात को लोगों ने शारीरिक तौर पर अपनाया है। लोगों की आस्था बाहरी दिखावे पर आकार इसलिए टिक गयी है क्योंकि हर धर्म इन्सान को बुरी आदतें छोड़ने की शिक्षा देता है जो की आसान नहीं है, हा बाहरी दिखावे को अपनाना आसानहै। इसलिए सभी बाहरी लक्षणों पर जोर देते है। धर्मं को भीतर से अपनाना जरुरी नहीं समझते। हमारे सभी धर्मगुरुओं को इस ओरध्यान देना चाहिए।

Shahvez Malik said...

Dear Giri ji,

Musalman ko apni pehchan tab tak batani padegi jab tak har ek ghair muslim kalma nahi pad leta qki sirf islam hi aisa dharm hai jo duniya me sabse behatreen or peaceful hai jaisa ki humare
DR. ZAKIR NAIK aksar aap logo ko aap logo ki kitabon se or apni kitabon se proof kar k dikhate rehte hain. Qki hum nahi chahte ki koi bhi gher muslim jahannam ki aag me jale, isliye hum humesha dua karte rahenge k Allah aap logo ko hidayat de. AMEEN.

DR. ANWER JAMAL said...

जब तक कि सारा हिन्दुस्तान ऋषि मार्ग के अनुसार एक ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पित नहीं हो जाता .