Saturday, April 10, 2010

आते ही चली जाती हो तुम -क्यों ? पार्ट- 2



आते ही चली जाती हो तुम -क्यों ?

आते ही तुम जाने की बातें करने लगती हो तुम, आखिर मैंने ऐसा क्या गुनाह कर दिया है तुम्हारे साथ कभी तो बोला करो कुछ तुम्हे तो अच्छी तरह से पता है की तुम जब आती हो मेरे घर में तो सब कितना खुश हो जाते हैं , चारो तरफ़ खुसी की लहर दौड़ जाती है, मेरे पड़ोसी भी कितने खुश हो जाते हैं की चलो दुबारा आई तो सही।

मेरे चहरे पर रौनक जाती है तुम्हे देख कर, मेरे घर का कोना कोना खिल उठता है, तुम्हारी आहट सुनकर। कितना आनंद आता है उस समय ये तो बस मुझे या मेरे बच्चो को पता है।

लेकिन तुम हो की रूकती ही नही, ना तो तुम्हारे आने का समय और ना ही तुम्हारे जाने का समय , तुम्हे क्या पता की तुम्हारे जाने के बाद मेरे बच्चे पुरी रात सो नही पाते और बच्चे ही क्यों में भी तो नही सो पता और सो भी कैसे जायें तुम जो नही होती। मेरी बीबी भी पुरी रात जग करके तुम्हारा इंतजार करती रहती है की तुम कब आओगी और हम सब कब अपना कूलर और पंखा चला कर के सोयें। और रात ही क्या दिन में भी तो तुम्हारी पुरी जरुरत होती है। तुम्हारे बिना तो ठंडा पानी भी नही मिलता पीने को।

कृपया मेरे पुरे परिवार पर तरस खावो तुम और अगर २४ घंटा नही रह सकती तो कम से कम १५-२० घंटा तो रुको, लेकिन तुम हो की -१० घंटे में ही निकल लेती हो। तुम्हारे घर अगर जा करके पता करे तो कोई भी आदमी सही जबाब नही देता तुम्हारे घर वालो के पास तो रता - रटाया बहाना होता की आज फलां मोहल्ले में तार टूट गई है या फलां मोहल्ले का ट्रांस्फोर्मेर ख़राब हो गया है।

हे बिजुली रानी कृपया मेरे ऊपर तरस खाएं और मेरे घर आयें तो कुछ समय मेरे बच्चो के साथ जरुर बिताएं।

5 comments:

VICHAAR SHOONYA said...

ये आपकी प्रेयसी बड़ी चंचला है। चपला है। कभी कभी तो बहुत तरसाती है। पास रहे तो सर्द रातें भी गर्म हो जाती है। और पास ना रहे पसीने पसीने भी कर देती है। हमें भी बहुत सताया है इसने। क्या करें कोई और विकल्प भी तो नहीं है?

महामूर्खराज said...

giri ji goan mere gaon me to ye aapki preyasi ki caplta aur chanchhalta aur adhik bad jati hai

वन्दना said...

हा हा हा ………।बडी बेवफ़ा है।

सुलभ § सतरंगी said...

वाजिब फरयाद है. मैं भी अपने जिले/घर में झेलता हूँ.

फ़िरदौस ख़ान said...

हा हा हा...आजकल हर जगह कमोबेश यही हाल है...