Thursday, February 3, 2011

आप अपने बच्चो को क्या सिखाते हैं। ---तारकेश्वर गिरी.

आप अपने बच्चो को क्या सिखाते हैं।

बच्चे हमेशा से प्रखर बुद्दी लिये हुए पैदा होते हैं, आज कल के बच्चे कभी -कभी ऐसा सवाल अपने माँ -बाप के सामने दाग देंगे जिसका जबाब देते हुए नहीं बनता।

ये बच्चे सबसे ज्यादा या कह ले कि अपने समाज से ही सब कुछ सीखते हैं, समाज कि सबसे छोटी इकाई हैं घर। घर में हो रहे किर्या कलाप को बच्चे बड़ी ही गंभीरता से अनुसरण करते हैं। घर के लोग आपस में जो भी बात करते हैं बच्चे उसकी नक़ल भी करते हैं। अब सवाल ये हैं कि हम अपने बच्चो को सिखाते क्या हैं।

हम तो सिखाते बाद में हैं , जरुरत कि काफी बाते तो हमसे खुद ही सीख जाते हैं।

मसलन कि अगर हम अपने घर में किसी दुसरे धर्म कि बुराई करेंगे या किसी जाती विशेष कि बुराई करेंगे या किसी पडोशी के बारे में अपशब्द कहेंगे तो बच्चे तो सीखेंगे ही ।

9 comments:

दीर्घतमा said...

अपने धर्म की शिक्षा जरुरी हुई.

दीर्घतमा said...

अपने धर्म की शिक्षा जरुरी हुई.

Shah Nawaz said...

बिलकुल सही कह रहे तारकेश्वर भाई... बच्चे तो आइना होते हैं, जैसा हम करते हैं यह वैसा ही सीखते हैं. बल्कि आज-कल के बच्चे तो आज तक से भी तेज़ हैं... :-)

निरंजन मिश्र (अनाम) said...

बोया पेस बाबुल का तो आम कहा से पाय
किसी ने बिलकुल सही कहा है ......

यहा भी स्वागत है :-
धर्म संस्कृति ज्ञान पहेली - 3
जवाब देने का अंतिम समय शुक्रवार 2.00 बजे तक

निरंजन मिश्र (अनाम) said...

पेस= पेड़

कुमार राधारमण said...

बच्चों के भीतर का बालपन जो छिन गया है,वह हमारे घरेलू माहौल का ही नतीज़ा है।

राज भाटिय़ा said...

आप से सहमत हे जी

एस.एम.मासूम said...

मसलन कि अगर हम अपने घर में किसी दुसरे धर्म कि बुराई करेंगे या किसी जाती विशेष कि बुराई करेंगे या किसी पडोशी के बारे में अपशब्द कहेंगे तो बच्चे तो सीखेंगे ही
.
arre bhai yahee seekh ke to taraqee karenge, neta baneinge,
.
kya chahte to bachcha imandaar bane aur kisee kaam ka na rahe...?

G.N.SHAW said...

ISI LIYE TO KAHATE HAI KI APANE GHAR KO PAHALE SAMBHALO...SUNDA AALEKH..