Sunday, March 21, 2010

मैं खुद अपने आप को हिन्दू कहता मानता और लिखता हूं ।

मैं खुद अपने आप को हिन्दू कहता मानता और लिखता हूं । सीता जी को माता और श्री रामचन्द्र जी को मर्यादा पुरूषोत्तम मानता हूं । मैं तो इस बात की भी परवाह नहीं करता कि लोग उन्हें काल्पनिक और मिथकीय पात्र मानते हैं ।

श्रीमान डॉ अनवर जमाल

मतलब ये की श्रीमान अनवर आप इस बात को मानते हैं की सीता माता और भगवन राम काल्पनिक हैं। लेकिन कभी -कभी मुझे ये लगता है की कंही आप खुद काल्पनिक तो नहीं हैं। कभी ये मत कह दीजियेगा की कुरान और मोहम्मद साहेब भी काल्पनिक पात्र हैं।

आप से अनुरोध है की आप अपना कीमती समय देश की सेवा मैं लगाये, अपने लोगो की भलाई मैं लगाये। हमारा भारत देश पहले ही आतंकवाद, गरीबी , और न जाने कितनी तरह की बेमानी बीमारियों से घिरा है ।

और आप से ये भी विनम्र निवेदन है की आप धर्म ग्रंधो का सही तरीके अध्यन किया करे , क्योंकि आधी अधूरी जानकारी खरनाक साबित होती है। अपनी राय रखना एक अलग बात होती है और अपना फैसला बताना अलग होता है। देश के मुल्लावो ने पहले ही अनपढ़ लोगो के दिमाग मैं न जाने कितनी ग़लतफ़हमी डाल राखी है, आप तो पढ़े लिखे हैं।






12 comments:

राज भाटिय़ा said...

अरे छोडो इन लोगो को इन के कहने से कुछ नही हो सकता.

Tarkeshwar Giri said...

Bhatiya ji Namashkar, Hamari udarta hi inko badhawa deti hai.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

इन्सान वही है जिसकी कथनी और करनी में समानता हो...लेकिन यहाँ तो वो हाल है कि लोग दूसरों के सामने विद्वान होने का आडम्बर रच रहे हैं जब कि वो खुद भी जानते हैं और पढने वाला भी उनके बारे में भली भान्ती परिचित है कि अन्दर से ये लोग कितने खोखले हैं...नितांत शून्य,टोटली जीरो!!!

vedvyathit said...

aapkis se yh ummid kr hre hain jin ka ek matr uddeshy hi hindoo dhrm ke prti nfrt failana hai kyon ki un ki kitab me hi aisa prman shit likha hai aur yh hi unhe pdhaya v rtaya tatha krvaya ja rha hai aur ve aisa kr rhe hain to un se apaur kya ummid ki ja skti hai
yh is desh ka durbhagy hai ye apne poorvjon ko bhi gali de rhe hain hinduon ko gali nhi hai yh yh ve apne poorvjo ko gali de rhe hain fir ve aur kis ke sge ho skenge
hindu dhrm is desh ka dhrm hai khin bahr se nhi aya jin ka bahr se aaya hai ve kuchh bhi kr skte hain
dr. ved vyathit

HINDU TIGERS said...

भीख मांग कर हज करने वालों से आप और क्या उमीद कर सकते हैं। इनकी गद्दारी तो देखो जिस भारत की रोटी से जिन्दा हैं उसी भारत की आत्मा को मानने से इनकार कर रहे हैं हमने तो पहले ही कहा था गद्दरी नमक हरामी इनकी रग-रग में है। इनका ईलाज हमारे पास है पर क्या करें...हमारे अपने ही रोक देते हैं

मिहिरभोज said...

गर्व से कहो हम हिंदु है....जमाल साहब को भी कहने दो.....क्यों उनमें राम औऱ कृष्ण का खून नहीं है क्या.....मोहम्मद साहब का तो नहीं ....ये तो गारंटी है

Amitraghat said...

तारकेश्वर जी अपनी कीमती ऊर्जा को अनवर साहब से बहस करके मत वेस्ट कीजिये......"
amitraghat.blogspot.com

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

samay kharaab karana hai in jaiso ko padhana

Tarkeshwar Giri said...

श्रीमान अमित जी और श्रीमान धीरू जी। हमारे पूर्वाज्वो की गलती का ही नतीजा है जो आज हम भुगत रहे हैं। आज अगर आप चुप हो गए तो आने वाली पीढ़ी हमें गाली देगी। जैसे कुछ लोग गाँधी जी को दोष देते हैं। मुझे इनके धर्म से कोई गला सिकवा नहीं है , अगर है तो सिर्फ इसलिए की ये दूसरो को सदा नीचा दिखाने मैं लगे हुए है।

DR. ANWER JAMAL said...

@Bhai Giri ji
Main Shri Ram chandra ji ko kalpnik nahin balki yatharth manta hun aur Jo unhen kalpnik kehte hen unka khandan karata hun.
ye mere shabd hain aur ye hai mere shabdon ka arth.
ye arth mujhe mullaon ne hi sikhaya hai.
molvi hazraat ke prati Durbhavna mat paliye.

http://vedquran.blogspot.com/2010/03/rajyoga-or-sashtang.html

muk said...

तारकी तुमने इस की
रामदेव जी खुद बेचैन हैं । वहां मुझे क्या चैन मिलेगा ?
आर्टिकल पर गुड टिप्‍प्‍णि करी

Anil Pusadkar said...

जी आपसे सहमत हैं और आपकी तरह ही हम भी खुद को हिंदू कहते,मानते और लिखते हैं।