Saturday, January 23, 2010

तेरे बाप के पास तो मस्त पटाखा मॉल है न खुद चलता है न औरो को चलाने देता है।

मोहल्ले वाले कहते हैं की तेरे बाप के पास तो मस्त पटाखा मॉल है खुद चलाता है औरो को चलाने देता है (एक छोटी सी बच्ची बोली) .अरे पागल वो सब तो तेरी माँ के बारे मैं कह रहे होंगेउस छोटी सी बच्ची का बाप बोला। (मैं आप सभी लोगो से माफ़ी मांगता हूँ इसे लिखना नहीं चाहता था मगर लिखना पड़ा) ये शब्द हैं एक टी वी प्रोग्राम्म मैं एक छोटे से बच्ची की जो गंगुं बाई के रोल मैं सब को हँसाने का काम करती है

काल शाम को बार बार टी वी मैं एड रही थी , मैंने भी ध्यान दिया तो पता चला की वाह रे भारतीय संस्कृत और व्यस्था, सब बड़े मजे से उस छोटी सी बच्ची के द्वारा कहे गए शब्दों के उपर हँसे जा रहे थे, हँसने वाले सब बड़े थे बच्चे नहीं और उस बच्ची के माँ बाप भी थे

उनकी बच्ची इस तरह के शब्दों का सहारा लेकर खूब पैसा कमा रही है, वो छोटी सी बच्ची अपने माँ बाप के लिए रोज कमाती है, इसलिए बच्ची के माँ और बाप तो बड़े मजे से ताली बजा रहे थे, और इस का फायदा टी वी चैनेल भी खूब मजे से उठाते हैं

क्या है ये, बाल मजदूरी या बच्चो को सेक्स पाठ पढाया जा रहा है। क्या सरकार इसे बाल मजुदुरी कहेगी या कुछ और.......
क्या इस तरह के शब्द बच्चो के मुंह से अच्छे लगते है।

इस विषय पर मैं आप सबकी राय जानना चाहता हूँअगर विषय अच्छा लगे तो पसंद पर चूहे को जरुर मारिएगा

6 comments:

Mithilesh dubey said...

बहुत ही दुःख होता है जब इस तरह के अश्लिल चिजे देखता हूँ टीवी पर, पैसा और पाश्चातवाद लोगो पर इतना हावी हो गया है कि लोगो को अपनी संस्कृति की , अपनी पहचान की कोई फिक्र ही नही है ।

संजय बेंगाणी said...

यह बाल मजदूरी ही है. साथ ही अनैतिक भी.

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) said...

मित्र बाजार वाद भारत को नरक की ओर ले जा रहा है , हम तो केवल दर्शक है जरा उन पैसे के लालची माँ बाप पर गोर करो जिनके बच्चे इस तरह के प्रोग्राम करते है , और वो उनकी इस हालत पर रोने की बजाय तालिया बजाते है
सादर
प्रवीण पथिक
9971969084

अविनाश वाचस्पति said...

सारा बाजार इसी से अटा पड़ा है
मन आपका हमारा जार जार हो रहा है
पर पैसा ऐसी कुत्‍ती शै है (मजबूर हूं लिखना तो नहीं चाहता था पर अपने को रोक नहीं सका)
जो किसी से भी कुछ भी करा सकती है
नतीजा सामने है
वो बच्‍ची हमारी ही है
और दोषी भी हम ही हैं।

राज भाटिय़ा said...

सच मै दोषी हम सब है, हम क्यो नही इस के खिलाफ़ बोलते, क्यो नही ऎसे टी वी को देखना बन्द नही करते, क्यो बेशबरी से देखते है, क्यो नही इन बच्चो के मां बाप को लानत भेजते
यह तो बहुत ज्यादा हो गया, पैसो के लिये अपनी बेटी ऎसे ही तो बेची जाती है, जेसे इस बच्ची के मां बाप ने बेच दी... इस बच्ची का भविष्या क्या होगा?
आप का धन्यवा बहुत अच्छी जानकाई दी

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

इन्ही सब के चलते हम तो टेलीवीजन देखना ही कब का छोड चुके हैं....न तो ये लोग सुधरने वालें हैं और न ही सरकार।