Sunday, July 28, 2013

राहुल गाँधी को राजनीती विरासत में मिली है, अपनी कमाई से नहीं

राहुल गाँधी को राजनीती विरासत में  मिली है, अपनी कमाई से नहीं , राहुल से अच्छे नेता तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हैं , जो खुद फैसला लेना जानते हैं , लेकिन राहुल …

…सिर्फ गरीबो के घर में रात  गुजार देने से और उनके घर का बना खाना खा लेने से कोई इतना बड़ा नेता नहीं बन सकता, की उसको देश  चलाने की जिम्मेदारी दे दी जाय . 

मुझे अफ़सोस होता है, तब - जब की ये जानते हुए  की कांग्रेस पार्टी में एक से बढ़ कर एक अनुभवी नेता है कई दशको का अनुभव उन नेतावो के पास है , फिर भी ये बुजुर्ग नेता राजनीती के गुण सिखने के लिए राहुल गाँधी की कक्षा में पहुँच जाते हैं .

  

Sunday, July 21, 2013

राष्ट्रवादी ( NATIONALIST) क्या जाती या संप्रदाय के नाम से जानी जाती है .

मेरे बड़े बही शाहनवाज जी , ये हिंदुस्तान है, 

राष्ट्रवाद के साथ ये तो देश का नाम  जोड़ना ही पड़ेगा , जैसे पाकिस्तानी - पाक  राष्ट्रवादी, ( वो अलग बात है की राष्ट्रवादी शब्द संस्कृत का है,) नेपाली राष्ट्रवादी, भूटानी राष्ट्रवादी , ब्रिटिश राष्ट्रवादी । 

मुस्लिम राष्टवादी नहीं 

क्योंकि राष्ट्रवादी का मतलब इंग्लिस में NATIONALIST  होता है और वो उसके देश से जुड़ा होता है न की जाती या संप्रदाय से 

Saturday, July 20, 2013

इंडियन और भारतीय कहने में शर्म नहीं आती .

इंडियन और भारतीय कहने में शर्म नहीं आती .

जब  इंडियन और भारतीय कहने में शर्म नहीं आती है तो फिर हिन्दू या हिंदुस्तानी कहने में  शर्म क्यों आती है,  हमारे देश को अंग्रेजो ने लुटा जो लुटा , लेकिन अपने पीछे जिनको छोड़ गए , वो हमारी पहचान ही बदलने में लग गये.


Friday, July 19, 2013

सभी को प्रणाम

सभी को प्रणाम

जब देखो तब इ  लोग प्रकाशन बंद कर देते हैं, कुछ न कुछ अडंगा लगा के.

आज फिर से एक try मार रहे है. 

Monday, July 15, 2013

हिन्दू - हिंदुस्तान और हिन्दू राष्ट्रवादी

हिन्दू - हिंदुस्तान और हिन्दू राष्ट्रवादी

पुरे भारत में आजकल जबरस्त बहस का   मुद्दा बना पड़ा है ये दो शब्द . राजनितिक पार्टियाँ तो विरोध मैं आ गई हैं, देश की जनता भी कूदने को तैयार है.

नेपाल में रहने वाले को हिन्दू नहीं नेपाली कहते हैं, बंगलादेश में रहने वाले को बंगाली उसी तरह , भूटानी, आसामी, बिहारी, पंजाबी, मराठी, पाकिस्तानी, इराकी, अरबी, वैगरह -वैगरह .

लेकिन आसामी, बिहारी, पंजाबी, मराठी को छोड़ दे तो क्या भूटानी राष्ट्रवादी नहीं होते , या पाकिस्तानी  राष्ट्रवादी नहीं होते.

फिर हिंदुस्तान में रहने वाला हर बंदा हिन्दू राष्ट्रवादी क्यों नहो हो सकता , आपने आप को भारतीय कहने मैं शर्म नहीं आती है, इंडियन कहने मैं शर्म नहीं आती है तो फिर हिन्दू कहने मैं शर्म क्यों  आती है.





Monday, June 17, 2013

गुजरात दंगो का असली जिम्मेदार कौन :-

गुजरात दंगो का असली जिम्मेदार कौन :- नरेन्द्र मोदी , या गुजरती हिन्दू, या गुजरती मुसलमान .

पुरे हिंदुस्तान के लोगो को ये बात पता है की गुजरात दंगो की शुरुवात , अयोध्या से कार  सेवा कर के लौट रहे कार  सेवको को गोधरा मैं  ट्रेन की पूरी बोगी को को चारो तरफ से बंद करके जिन्दा जला देने के बाद शुरू हुई .

इस भीषण हत्या कांड के पीछे ना तो मोदी का हाथ है और न ही गुजरती हिन्दू या गुजरती मुसलमानों का, इस भीषण हत्या कांड के पीछे  कट्टर पंथी ताकतों का हाथ था, जिनका न तो कोई धर्म होता है और न ही कोई जाती .


लेकिन 1984 में देश की राजधानी दिल्ली में हुए सिखों के खुले आम कत्ल , लुट, बलात्कार का जिम्मेदार सिर्फ  कांग्रेस पार्टी और उस पार्टी के चमचे ही शामिल थे. ये बात भी पुरे भारत के लोगो को पता है,

लेकिन उसके बाद भी ये हमारे देश के चुरकुट , हरामी , और बेईमान , और निक्कमे नेता इस बात को भूल करके , आम आदमी, गरीब इन्सान , और साथ मैं भोले भाले देशवाशियों को फंसाते रहते हैं, और इस देश के कुछ बेवकूफ लोग जाती वाद , पार्टी वाद मैं फंस करके , इस देश का बेडा गर्ग करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं .

Wednesday, June 12, 2013

सबसे बड़ी सांप्रदायिक राजनीतिक पार्टी और सरकार .

सबसे बड़ी सांप्रदायिक राजनीतिक  पार्टी और सरकार .

आज कल या आज से काफी पहले से हमारे देश में जब भी कोई चुनाव की बात आती है तो सांप्रदायिक और अ सांप्रदायिक सरकार या राजनीतिक पार्टियों के बारे में जोर शोर से बहस चालू हो जाती है.

देश की सबसे बड़ी सांप्रदायिक पार्टी भाजपा ( बाकि राजनीतिक पार्टियों की नज़र से)  है, जिसने राम मंदिर के नाम पे राजनीती की शुरुवात की और बाबरी मस्जिद का ढांचा तुडवा दिया . अयोध्या से  गुजरात लौट रहे कार सेवको पर ट्रेन मैं हुए हमले के बाद गुजरात में दंगा फैला कर के तमाशा देखा , जिसमे लगभग 800 मुस्लिम और लगभग 300 हिन्दू मारे गये.

उसे भी पहले राम मंदिर का विवादित ढांचा गिराते समय मुलायम सिंह की सरकार में लगभग 1000 हिन्दू मारे गए थे जिसका कोई सरकारी दस्त वेज ही नहीं बचा , क्योंकि अयोध्या में मीडिया के घुसने पे ही प्रतिबन्ध लगा दिया गया था .

थोडा और पीछे जांए तो 1984  श्रीमती इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद कांग्रेस सरकार ने सिर्फ दिल्ली मैं ही 3000 सिखों का क़त्ल करवा दिया . 

समस्या ये है की सारी पार्टियाँ ही भ्रष्ट और सांप्रदायिक हैं, भरोसा करे तो किस पर,  ममता बनर्जी ने जिस समय कांग्रेस की सरकार से अपना समर्थन वापस लिया था उस समय मुलायम भी ममता के साथ थे और मायावती भी, लेकिन C B I की डर से दोनों पीछे हट गए ,

गुजरात दंगो में मारे गए मुसलमानों की सबकी चिंता है , लेकिन मारे गए हिंदुवो और सिखों की किसी को भी नहीं .

अब ममता और मुलायम जी मिल करके तीसरे मोर्चे का सपना देख रहे हैं तो कांग्रेस अपने तीसरे टर्म का,

डर  है तो सिर्फ नरेन्द्र मोदी का .