Friday, March 19, 2010

आखिर बरेली मैं दंगा हुआ क्यों ? - बरेली दंगो का सुच

आखिर क्या वजह थी बरेली मैं दंगा होने की , सरकार ने क्या किया किसी कुछ भी पता नहीं , शुरु किसने किया और और क्यों ? , क्या बरेली सिर्फ हिन्दू और मुसलमनो का शहर है, इंसानों का नहीं। क्या बरेली में कोई इन्सान नहीं रहता है। क्या अल्लाह और भगवान के नाम पर लोग मरने के लिए इतने उतावले हो गए हैं।

आखिर सुच क्या है , मुझे तो पता नहीं लेकिन श्रीमान अरविन्द जी की पोस्ट ने मुझे विचलित कर कर दिया है, लोगो से दुबारा ये कहने के लिए की इंसानों जागो ....................................

http://bharatshri.blogspot.com/2010/03/blog-post_18.html

८-०३-२०१०

बरेली दंगों का सच

होली के दिन उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में मुसलमानों के जुलूस के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। दंगों को लेकर देशभर में काफी आरोप प्रत्यारोप हुए। कई प्रकार की बातें कही गईं। लेकिन इन दंगों की सत्यता क्या थी, इस बारे में देशभर की मीडिया लगभग मौन सी ही रही है। इन दंगों के संदर्भ में मैने काफी पड़ताल की है, उसके आधार पर ये बातें स्पष्ट तौर पर कही जा सकती हैं कि दंगों और उसके बाद के घटनाक्रम के संबंध में सरकार का रवैया तो पक्षपातपूर्ण रहा ही, मीडिया के एक वर्ग में भी निष्पक्षता का काफी अभाव दिखा। प्रस्तुत है एक रिपोर्ट -

बरेली में सांप्रदायिक दंगा राज्य की बसपा सरकार और कांग्रेस की मिलीभगत का परिणाम है। एक दम शांत माहौल में एकाएक दंगा भड़क उठना राज्य सरकार की कानून व्यवस्था और वोट बैंक की तुच्छ राजनीति पर कई प्रश्न खड़े करता है। पहली बात तो यह है कि उत्तर प्रदेश काफी समय से सांप्रदायिक दंगों से मुक्त रहा है। पिछले वर्षो में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और वैमनस्य बढ़ाने के प्रयास किए गए लेकिन सांप्रदायिक हिंसा से यह प्रदेश बचा रहा।

दंगों की पृष्ठभूमि और शुरुआत
यह दंगा हिंदुओं के त्योहार होली के दिन इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्म दिवस यानि बारावफात के उपलक्ष्य में मुसलमानों द्वारा निकाले जुलूस के दौरान हुई झड़प से शुरू हुआ। हालांकि, इसके लिए जमीन तो काफी पहले से बननी शुरू हो गई थी। किसी भी दंगे का तात्कालिक कारण चाहे जो भी हो लेकिन उसके लिए तैयारियां काफी पहले से की जाती हैं और यदि प्रशासन एवं समाज की नजरें तेज हों तो आमतौर पर हवा में तैरते अंदेशों को पढ़ा जा सकता है।

ये बातें भी कम प्रश्नवाचक नहीं हैं कि आखिर दो मार्च को होली के दिन भी मुहम्मद साहब के जन्मदिन के उपलक्ष्य में एक बार पुनः जुलूस-ए-मुहम्मदी निकालने का मुस्लिम समाज द्वारा निर्णय किया गया। जबकि, मोहम्मद साहब का जन्मदिवस तो 27 फरवरी को था, और इस अवसर पर निकाला जाने वाला परंपरागत ‘जुलूस-ए-मुहम्मदी’ उसी दिन निकाला जा चुका था। हालांकि, इससे पहले कभी भी ऐसा नहीं हुआ है कि उनके जन्मदिवस पर अलग-अलग दिनों में दो बार जुलूस निकाला गया हो।

सूत्र बताते हैं कि जुलूस की अनुमति प्रशासन ने आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खाँ और एक कांग्रेसी सांसद के दबाव में आकर दिया। जबकि प्रशासन इसकी अनुमति न देकर इस हादसे को होने से रोक भी सकता था।

ध्यातव्य हो कि आईएमसी एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल है, जिसने बीते लोकसभा चुनाव में प्रदेश के 4 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इसके पहले यह दल अन्य दलों को चुनावों में समर्थन देता रहा है।

आखिर, एकाएक अमन पसंद मोहल्लों को दंगे की आग में कैसे और किसने झोंक दिया? पुलिस कहती है कि सबकुछ अचानक हो गया। मगर, हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

खुफिया एजेंसियों की पड़ताल भी पुलिस से अलग जा रही है। इशारा खतरनाक साजिश की तरफ है। दंगा पूर्व सुनियोजित था। जुलूस में शामिल कुछ मुसलमान युवक पूरी तैयारी से थे। भीड़ का फायदा उठाकर उपद्रवी हाथियारों से लैस होकर पहले हर तरफ फैल चुके थे। इसीलिए शहर के चाहबाई क्षेत्र में विवाद होते ही जगह-जगह आगजनी होने लगी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जुलूस में शामिल बाहर के लोगों के पास पेट्रोल से भरी बोतलें, माचिस और गड़ासे कहां से आए?

मंगलवार को करीब ढाई बजे जुलूस-ए-मुहम्मदी अपने पूरे रंग में था। अंजुमनों की टुकड़ियां शांति पूर्वक अपने रास्तों से होती हुई कोहाड़ापीर की तरफ बढ़ रही थीं। अचानक सबकुछ थम सा गया।

पुलिस के मुताबिक, अंजुमन चाहबाई के परंपरागत रास्ते की बजाय दूसरे रास्ते की तरफ बढ़ गई थी, जिसका दूसरे पक्ष ने विरोध किया। असल में वह रास्ता अंजुमन का नहीं था। पुलिस समझौता करा रही थी। इसी बीच बवाल शुरू हो गया, लेकिन सिर्फ इतनी बात पर लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाएंगे? यह बात कम से कम उन लोगों के गले नहीं उतर रही, जिन्होंने दंगों का दंश झेला, बर्बादी झेली। मौत को आंखों के सामने नाचते देखा।

सामाजिक कार्यकर्ता श्री अरूण खुराना कहते हैं कि जिस जगह रास्ते को लेकर विवाद हुआ, वह झगड़ा तकरीबन शांत हो गया था। इसी दौरान भीड़ में शामिल कुछ खुराफातियों ने माहौल भड़काने के लिए राह चलती हिंदू लड़कियों और महिलाओं से छेड़छाड़ शुरू कर दी, जिस पर दूसरे पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। किसी ने पत्थर भी फेंक दिया, जिसके जवाब में दूसरा पक्ष भी शोरशराबा करने लगा। मौका देखकर भीड़ में पहले से शामिल उपद्रवियों ने आगजनी और तोड़फोड़ शुरू कर दी। उनके हाथों में पेट्रोल से भरी बोतलें और माचिसें थीं, गड़ासे भी थे। वह पहले से चिन्हित घरों में लूटपाट करते और पेट्रोल छिड़ककर आग लगा देते। गंड़ासे गर्दन पर रखकर महिलाओं के गहने और नकदी लूटी गई।

उन्होंने बताया कि उपद्रवियों ने हिंदू लड़कियों और महिलाओं के साथ बदसलूकी की सारे हदें पार कर दीं। यही कोहाड़ापीर, शाहदाना, डेलापीर, संजयनगर, बानखाना क्षेत्रों में हुआ। वहां भी भीड़ में पहले से मौजूद दंगाइओं ने आगजनी शुरू कर दी।

हिंसक घटनाओं के मद्देनजर शहर के बारादरी, किला, प्रेमनगर और कोतवाली क्षेत्रों में उसी दिन शाम 6 बजे से बेमियादी कर्फ्यू लगा दिया गया, जो आज पंद्रहवें दिन भी जारी है। हालांकि, कर्फ्यू में ढील धीरे-धीरे बढ़ायी जा रही है। आज 17 मार्च को सुबह 6 बजे से शायंकाल 5 बजे तक ढील दी गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता श्री रमेश बताते हैं कि दंगे की पूरी तैयारी कुछ दिन पहले ही कर ली गई थी। इसकी जानकारी पुलिस महकमे को भी थी लेकिन उसने चुप्पी साधे रखा। ज्यादातर दंगाई किला, कोतवाली और प्रेमनगर इलाके में हुए दंगे के बाद किला इलाके में जाकर छिपे जो क‌र्फ्यू में छूट मिलने के बाद अपने ठिकानों पर भाग निकले।

तौकीर रजा नाटकीय ढंग से गिरफ्तार एवं रिहा

जुलूस-ए-मुहम्मदी को नए रास्ते से ले जाने का विरोध करने वाले हिंदुओं के खिलाफ जहरबयानी करते हुए तौकीर रजा खाँ ने कहा, ‘जिस व्यक्ति ने हमारे अंजुमनों को रोकने का प्रयास किया है, हम उसके घरों में आग लगाएंगे और उनकी बहू-बेटियों की इज्जत के साथ खेलेंगे।’

तौकीर के इस बयाने के बाद शहरभर में हिंसा भड़क उठी थी। और उपद्रवियों ने आठ चिन्हित हिंदू घरों तथा करीब 12 दुकानों को आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा दंगों के दिन से 17 हिंदू लड़कियां के गायब होने की सूचना मिली है, जिनमें से 6 लड़कियां वापस अपने घर आ गई हैं।

तौकीर रजा की गिरफ्तारी सात मार्च को हुई। उसकी गिरफ्तारी के विरोध में बरेली और आस-पास के जिलों से आकर करीब तीस हजार मुसलमान कर्फ्यू के बीच में ही इस्लामिया इंटर कालेज में लगातार 24 घंटे धरने पर बैठे रहे। इसी बीच राज्य शासन ने डीआईजी और डीएम का स्थानांतरण कर तौकीर रजा की रिहाई का मार्ग प्रशस्त कर दिया। नए डीआईजी और डीएम की नियुक्ति के बाद तौकीर रजा को रिहा कर दिया गया। उसकी रिहाई का समाचार सुनकर हिंदू समाज आक्रोशित हो गया।

ध्यातव्य हो कि जब हिंदू प्रताड़ित हो रहे थे तब सरकार को कोई सुधि नहीं थी लेकिन तौकीर रजा की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया। प्रशासन का यह रवैया पक्षपातपूर्ण है।

वर्तमान में भारत जिस राह पर चल रहा है, उसमें धार्मिक या जातीय आधार पर झगड़ों के लिए गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। लेकिन बरेली में सांप्रदायिक दंगे हो रहे हैं। दंगों में कोई भी पक्ष जीतता या हारता नहीं है, जीतते सिर्फ वे लोग हैं जिनके स्वार्थ सांप्रदायिक हिंसा से सिद्ध होते हैं और आम जनता चाहे वह किसी भी संप्रदाय की हो, जरूर हारती है। जहां भी सांप्रदायिक दंगे हुए हैं, वहां स्थानीय निहित स्वार्थो ने योजनापूर्वक दंगे भड़काए हैं ।

बरेली में भी ऐसे तत्वों को पहचाना जा सकता है और प्रशासन को चाहिए कि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और समाज को चाहिए कि उनका बहिष्कार करे। रोटी, कपड़ा, बिजली, पानी, विकास, सुरक्षा जैसे मुद्दे आम आदमी के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हैं, चाहे वह किसी भी संप्रदाय का हो। इन समस्याओं को हल करते हुए समाज के लिए धर्म के नाम पर जूझने की फुरसत नहीं होनी चाहिए। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि बरेली की चिंगारी वहीं पर बुझा दी जाएगी और यह आग ओर नहीं भड़केगी।

Wednesday, March 17, 2010

डॉ अनवर जमाल - नमस्कार.

जमाल साहेब आपको मेरा नमस्कार, आप ने मेरे जबाब के लिए इतना इंतजार किया उसके लिए धन्यवाद्

पहली बात तो ये की हम सब इन्सान बनने से पहले वानर ही थे दूसरी बात ये की हनुमान जी सिर्फ हिन्दुस्तानी ही नहीं थे बल्कि वो पूरी दुनिया के लिए पुजयनीय हैं
दूसरी बात ये की आपने तो ठेका ले रखा है हिन्दू धर्म ग्रंथो के बारे मैं अनाप शनाप बकने के लिए क्योंकि आप का कुरान इसकी इजाजत देता है , मगर मेरा धर्म और मेरे धर्म ग्रन्थ इसकी इजाजत कभी भी नहीं देते की मैं कभी भी किसी धर्म के या धर्म ग्रन्थ के बारे अपशब्द कहूँ आप कभी सीता माता के बारे तो कभी भगवन राम के बारे मैं या हिन्दू औरतो के बारे मैं कुछ भी बोल देते हैं क्योंकि आपका कुरान इसकी इजाजत देता है हमारा धर्म नहीं

और आप ये भूल जाते है की कुरान सिर्फ अरबी संस्कृत के ऊपर आधारित है कुरान के अन्दर जो नियम और तरीके बताये गए हैं वो आज से १४ सौ साल पहले की जरुरत रही है आज दुनिया बहुत आगे निकल चुकी , हमें देखिये हम ने अपने आप को समय के हिसाब से बदला hai ।

Sunday, March 14, 2010

औरतो का सबसे बड़ा दुश्मन- कल्‍बे जव्‍वाद

औरतो का सबसे बड़ा दुश्मन- कल्‍बे जव्‍वाद। इन श्रीमान जी का नाम भी मुझे कट- पेस्ट कर के लिखना पड़ा, धन्य हो जय हो काशी वाले बाबा की

तो बात ये है की भारत वर्ष मैं औरत जाती को माँ और देवी के रूप मैं पूजा जाता है और सबसे बड़ी बिडम्बना भी ये है की पुरे संसार मैं औरत जाती का दुश्मन भी भारत वर्ष मैं ही रहता हैभारत वर्ष जंहा पर कदम - कदम पर माँ के रूप मैं अलग - अलग जगह अलग -अलग रूप की पूजा की जाती है , उसी माँ के देश मैं , उसी का एक सपूत आज कितनी घिनौनी बात कर रहा है, धिक्कार है ऐसे सपूत पर और उस सपूत की शिक्षा पर

धर्म की आड़ मैं जो शब्द कल्वे साहेब ने किये हैं उस शब्द को उन्ही के समाज के लोग पचाने पर लगे हुए हैंकंहा गए वेदों मैं विज्ञानं की खोज करने वाले और कंहा गए कुरान के गडितीय चमत्कार को दुनिया के सामने रखने वाले मेरे भाई बंधू

दरअसल गलती कल्वे साहेब की नहीं है , गलती है तो उस अरबी परंपरा की जो १४०० साल बाद आज भी भारत वर्ष मैं फल फूल रही हैऔर कल्वे साहेब जैसे लोग उसमे खाद पानी डाल रहे हैं

तभी तो मैं कहता हूँ की भारतीय संस्कृत को मत भूलो , उसे अपना लो, भारतीय संस्कृत दुनिया की सबसे पुरानी सामाजिक व्यस्था है जो आज भी अपने गौरव को संजोये हुए है

जय माता दीजय हो काशी वाले बाबा तुम्हारी लीला तुम्ही जानो

Saturday, March 13, 2010

जय भोले की और जय हो बरेली की जनता की.

मैं भगवान भोले नाथ से येही प्राथना करता हूँ की , हे जटा धारी बरेली वालो को ज्ञान दे, और किसी नेता- वेता के चक्कर मैं पड़ने से अच्छा है की अपने दिमाग से काम ले और शांति का माहौल बनायेमैं तो येही कहूँगा की सभी लोग अपने - अपने घर मैं शांति से बैठ जाये और हर उस आदमी का विरोध करे जो मामले को भड़काने पर लगा हुआ है , किसी भी धार्मिक नेता की बातो मैं ना आये, क्योंकि धार्मिक नेता लोग अपनी- अपनी रोटी सेकने के लिए ऐसे ही मौके की तलाश मैं रहतें हैंऔर भड़काऊ भासन के लिए तैयार रहते हैंआप सभी लोग खुद समझदार हैं और ऐसे मौके पर अपनी समझदारी का परिचय दे

मजहब कभी भी आपके घर रोटी लेकर के नहीं आएगा, रोटी आएगी तो सिर्फ और सिर्फ आपकी मेहनत सेआपकी ईमानदारी से और आपकी लगन सेकोई मुल्ला या कोई भी महंत सिर्फ आपको तोड़ सकता है , जोड़ नहीं SAKTA है,

जय हो काशी वाले बाबातेरी लीला अपरम्पार

Friday, March 12, 2010

मिस्टर हुसैन और डॉ अनवर जमाल।

दोनों एक थाली के चट्टे-बट्टे हैं, एक उम्र की सारी हदे पार कर चूका तो दूसरा अपने लिए अभी से कब्र खोदने के लिए तैयार हैहुसैन हिन्दू देवी की नग्न तस्वीर बनता है तो श्रीमान अनवर जमाल हिन्दू देवी देवतावो की छवि ख़राब करने पर तुले हुए हैंहुसैन तो हिंदुस्तान छोड़ करके भाग चूका है , देखते हैं की श्रीमान अनवर जमाल साहेब अपनी दौड़ कंहा तक लगते हैं

मैं अपने सभी धर्मो के भाई -बहेन ब्लोगेर से अनुरोध करता हूँ की किसी भी धर्म के प्रति गंदे शब्दों का इस्तेमाल करने वाले ब्लोगेर श्रीमान अनवर जमाल साहेब का विरोध करे, नहीं तो श्रीमान अनवर जमाल साहेब आने वाले समय मैं मुसलमानों और हिंदुवो के बीच एक और नई दिवार खडी कर देंगेहिंदुस्तान मैं सभी लोगो को आजादी है कुछ भी बोलने की मगर इसका मतलब ये कभी नहीं की किसी भी धर्म का मजाक उड़ाया जाय ।

आखिर क्या मिलता है किसी और धर्म की बुराई करके , क्या श्रीमान अनवर जमाल साहेब पाकिस्तान से मदद ले रहे हैं या सउदी अरब से।

Thursday, March 11, 2010

वेदों मैं विज्ञानं और कुरान मैं गणितीय चमत्कार

वेदों मैं विज्ञानं और कुरान मैं गणितीय चमत्कार , ऐसे लेख आज कल प्रतिदिन पढने को मिल रहे हैं। कुछ मुष्लिम ब्लोगेर अपना सारा काम छोड़कर के आज कल वेदों मैं विज्ञानं ढूंड रहे हैं तो कोई भाई कुरान के गणतीय चमत्कार को लोगो के सामने ला रहा है। लेकिन क्या इस से हमारे देश की समस्या का समाधान हो जायेगा। हिन्दू और मुसलमान के अलावा हमारे देश मैं बहुत सी ऐसे बुराइया हैं जिन पर हमें ध्यान देना चाहिए। शिक्षा, गरीबी, आंतकवाद जैसे मुद्दे पर ना की सारे के सारे धर्म के नाम पर लड़ने मरने के लिए बैठ जाये।

दुसरे धर्मो का मजाक उड़ना इस्लामिक लेखको की आदत सी बन गई है

दुसरे धर्मो का मजाक उड़ना इस्लामिक लेखको की आदत सी बन गई है, और उन्हें पता है की अगर इस्लाम को जिन्दा रखना है तो दुसरे लोगो का मजाक उड़ना ही पड़ेगालेकिन शायद हम हिन्दू होकर के ये काम कर पाए की किसी और धर्म के बारे मैं कुछ उल्टा पुल्टा लिखे, और येही कारण रहा है की हिन्दू हमेशा सभी धर्मो की इज्जत करते चले आयें हैंहिन्दू अगर मंदिर मैं जा करके पूजा करता है तो किसी पीर की माजर पर भी जा करके माथा टेकता है, लेकिन उसका नतीजा ये निकलता है की मुष्लिम ब्लोगेर अपनी औकात बचाने के लिए दुसरे धर्मो की धार्मिक पुस्तकों के साथ अच्छा खासा खिलवाड़ कर रहे हैंइसका जीता जगता उदहारण है श्रीमान अनवर जमाल और सलीम खान के ब्लॉगइनके पास वेदों की , रामायण की महाभारत और गीता की अच्छी जानकारी है मगर शायद इन चक्करों मैं ये लोग कुरान को भूल गए हैंअपने धर्म के प्रचार प्रसार मैं इनको हिन्दू और भारतीय संस्कृत से डर लगने लगा है इसलिए अब ये सरे ब्लोगेर पागल हो गए हैं

ये भूल गए की हमें भी अपशब्द लिखना और कहना आता है , लेकिन नहीं हमारी संस्कृत इसकी इजाजत नहीं देती,